सबसे पहले केएमपी पर एक टेंपो पलट गया। टेंपो पलटने से आवागमन धीमा हो गया और एक ट्राला जब धीमी गति से चल रहा था तो पीछे एक होंडा सिटी कार ने टक्कर मार दी। होंडा कार को भी पीछे से एक अन्य ट्राला ने टक्कर मारकर बुरी तरह से अंदर घुसा दिया। इसी दौरान एक के बाद एक करीब 22 वाहन आपस में टकरा गए।
पुलिस जब मौके पर पहुंची तो सबसे आगे ट्राला मिला। जिसके पीछे होंडा कार, 3 ट्रॉले, कैंटर, टेंपो 407, कंटेनर, ट्राला और कैंटर सहित 18 वाहन मिले। अन्य वाहन चालक मौके से फरार हो गए। मौके पर मौजूद चालक संजीव इटावा यूपी, शिवचरण, कालू, राकेश यूपी ने बताया कि कुछ वाहन चालक दुर्घटना के बाद वाहनों के साथ भाग गए।
कार की छत तोड़कर निकाले घायल
दुर्घटना में कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। कार में सवार दो घायल बुरी तरह से चिल्ला रहे थे। मौके पर मौजूद अन्य घायलों ने कार की छत तो तोड़कर दोनों घायलों को बाहर निकाला। जबकि चालक को कार से बाहर नहीं निकाल सके। दोनों बुरी तरह से घायल थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार पूरी तरह से ट्राला के नीचे दबी हुई थी जिसके चलते घायलों को कड़ी मशक्कत से बाद निकाले जा सके लेकिन जब तक चालक दम तोड़ चुका था।
मौके पर पहुंची पुलिस ने शव निकलवाने में क्रेन की मदद ली। शव कार के अंदर ही दबा हुआ था। जिसे एक घंटे की मेहनत के बाद भी नहीं निकाला जा सका तो क्रेन की मदद ली गई। क्रेन की मदद से ट्राला को उठाया गया। जबकि कार को तोड़ शव को बाहर निकाला।
जाम से बाधित हुआ केएमपी
दुर्घटना के समय केएमपी पर दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। जाम लगने का कारण हाईवे पर वाहनों का आपस में टकराने के बाद खड़ा होना रहा। कुछ वाहन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त थे, जिन्हें क्रेन की सहायता से हटाया गया। ऐसे में अन्य वाहनों का रास्ता भी बाधित हो गए क्योंकि कई वाहन चालक दुर्घटना के बाद मौके पर वाहनों को छोड़कर भाग गए।
पुलिस ने की मशक्कत
दुर्घटना के बाद पुलिस को यातायात सुगम करने के साथ साथ मृतक के शव को बाहर निकालने में मदद करनी पड़ी। पुलिस ने वाहनों को धक्का लगाकर एक तरफ किया। जबकि कार को तोड़ने के लिए पुलिस ने हथौड़ों और लोहे की रॉड से मेहनत की। एएसआई जितेंद्र कुमार ने दो घंटे तक हाईवे पर पसीना बहाया।
भगवान ने बचा लिया
चीनी भरकर पलवल की ओर जा रहे ट्राला चालक कालू सिंह निवासी कोटपुतली ने बताया कि दुर्घटना में उनका ट्राला दो वाहनों से एक साथ टकराने के बाद बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि ट्राला का केबिन टूट जाने के बाद उनकी जान बच गई। कालू के अनुसार वह करीब 30 मिनट तक ट्राला के अंदर चिल्लाते रहे। बाद में उन्हें राहगीरों की मदद से बाहर निकाला गया।