हरियाणा में बीते वर्ष जब इनेलो और बसपा का गठबंधन हुआ था, उसम समय भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने इसे बेमेल शादी का गठबंधन बताया था तो कांग्रेस के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा था कि ये गठबंधन चुनाव से पहले टूट जाएगा। मायावती की ओर से दिए गए संकेतों से साफ है कि इनेलो के साथ मिलकर बसपा लोकसभा और विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी। इनेलो प्रवक्ता प्रवीण अत्रे ने कहा कि इस संबंध में पार्टी के पास कोई अधिकारिक सूचना अभी तक नहीं आई है।
मायावती बोलीं, नकारात्मकता में उलझा गठबंधन
बसपा सुप्रीमो मायावती ने दिल्ली में पार्टी के सेंट्रल कार्यालय में लोकसभा चुनावों को लेकर समीक्षा बैठक की। इसमें प्रदेश बसपा के जिम्मेदार पदाधिकारियों से जींद उपचुनाव परिणाम के साथ इनेलो में खींचतान व टकराव से हरियाणा की राजनीति में हुए बदलाव पर चर्चा की गई। जिसमें सामने आया कि चौटाला परिवार में घमासान के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं।
इससे बसपा का इनेलो के साथ गठबंधन भी अछूता नहीं रहा है। ये गठबंधन की जन आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं है। इससे बसपा को लोकसभा व विधानसभा चुनाव में नुकसान हो सकता है। बैठक में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को आगामी निर्णय के लिए अधिकृत कर दिया गया। आमराय को ध्यान में रखते हुए मायावती ने फैसला लिया कि इनेलो के दो हिस्सों में बंटने का जींद उपचुनाव पर भी असर पड़ा और सीट गंवानी पड़ी।
वैसे भी इनकी तकरार बढ़ती जा रही है। जिससे बसपा-इनेलो का गठबंधन आगे बढ़ने के बजाए अब नकारात्मकता में उलझ गया है। अब पार्टी तभी इनके साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी अगर पार्टी एकजुट होती है। वैसे भी बसपा का हरियाणा में जनाधार पहले से बढ़ा है और पार्टी अपने बूते आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करेगी।