चंडीगढ़। कोरोना का संक्रमण दर शून्य पर आने के बावजूद अभी पीजीआई में इलाज के लिए मौके पर पंजीकरण की सुविधा फिलहाल बहाल नहीं की जाएगी। पीजीआई प्रशासन केअनुसार अगर एकदम से मौके पर पंजीकरण के जरिए ओपीडी शुरू कर दी गई तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। ऐसे में रिस्क नहीं लिया जा सकता। हालांकि पीजीआई प्रशासन ने सभी विभाग केप्रमुखों को टेलीकंसल्टेशन केजरिए पंजीकरण की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया है, ताकि मानकों का पालन करते हुए ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इलाज की सुविधा मुहैया कराई जा सके।
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विभाग अपने स्तर पर भी बुलाए मरीज
पीजीआई के डीडीए कुमार गौरव ने बताया कि फिजिकल ओपीडी को अगर सामान्य तौर पर शुरू कर दिया गया तो एक दिन में 10 से 15 हजार मरीज आने लगेंगे। ऐसे में संक्रमण से बचाव के मानकों का शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित नहीं हो पाएगा। इसके साथ ही तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए फिलहाल टेलीकंसल्टेशन के पंजीकृत मरीजों को ही फिजिकल ओपीडी में देखा जाएगा। विभागों के प्रमुख अपने स्तर पर अपने मरीजों को ओपीडी में बुला सकते हैं।
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जल्द खुलेंगी बंद दुकानें
कोविड के कारण पीजीआई की बंद हुई आधे से ज्यादा दुकान और कैंटीन जल्द ही पुन: संचालित होने लगेंगे। कुमार गौरव ने बताया कि ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही उसकी कैंटीन, कैफिटेरिया, गोल मार्केट की दुकानों के टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। इमरजेंसी की दवा की दुकान के टेंडर की कागजी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
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रेफरल सेंटर होने केकारण ट्रामा और इमरजेंसी के मरीजों केइलाज पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। इसके विस्तार के लिए कार्य योजना बनाई जा रही है। साथ ही संक्रमण से बचाव के मानकों को ध्यान में रखते हुए ओपीडी केमरीजों को भी बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-कुमार गौरव, डीडीए पीजीआई