पीयू सीनेट का चुनाव चार साल के लिए होता है। 31 अक्तूबर को चार साल पूरे हो जाएंगे। इससे पहले सीनेट के गठन का काम पूरा करना चाहिए था लेकिन बीच में ही चुनाव दो बार स्थगित कर दिए गए। जानकारों का कहना है कि चुनाव सितंबर माह में आसानी से हो सकते थे। पुटा के चुनाव भी बेहतर ढंग से करवाए गए लेकिन पीयू प्रशासन की मंशा कुछ और थी।
सीनेट के जरिए पीयू का संचालन होता है। देशभर से सदस्य चुनकर इसमें पहुंचते हैं और बेहतर से बेहतर निर्णय लिए जाते हैं। एकतरफा या मनमानी करने की गुंजाइश सीनेट में नहीं रहती। 100 साल से अधिक समय से सीनेट पीयू में कार्यरत है।
इसके चुनाव करवाने के लिए आधे से अधिक सीनेटरों ने यूटी प्रशासक, सलाहकार, डीसी, पंजाब सीएम, उपराष्ट्रपति आदि को पत्र भेजा लेकिन वहां से कोई भी सकारात्मक जवाब नहीं आया। हालांकि पीयू प्रशासन से जवाब तो मांगा गया था लेकिन चुनाव करवाने की मंशा कोविड के कारण नहीं है।
पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रकरण से पड़ी बोर्ड की नींव
केंद्रीय मंत्री व सांसदों के सामने सीनेट में कई बार हंगामा हुआ। कांग्रेस के एक गुट ने पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रकरण पर जिद पकड़ी और हाईकोर्ट प्रकरण को ले गए। उसी के साथ माहौल बदलता गया। जानकारों का कहना है कि इस प्रकरण के जरिये बोर्ड ऑफ गवर्नेंस की संभावनाएं बढ़ती गईं। हालांकि बोर्ड पीयू के लिए कितना फायदेमंद होगा, यह समय बताएगा।