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पीयू : सीनेट कार्यकाल का आज आखिरी दिन, चुनाव न होने से पर शिक्षक बोले- यह लोकतंत्र की हत्या

Sat, 31 Oct 2020 01:53 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब विश्वविद्यालय - फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट का कार्यकाल आज खत्म हो जाएगा। 31 अक्तूबर आखिरी दिन है। चुनाव करवाने के लिए सीनेटरों ने ताकत झोकी है, लेकिन सफलता अभी तक नहीं मिल पाई। उधर, पीयू के जानकार शिक्षकों का कहना है कि यदि बोर्ड ऑफ गवर्नेंस भी बन रहा है तो उसकी मंजूरी सीनेट के जरिए होनी चाहिए थी।

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बोर्ड में चयनित होने वाले लोगों के नाम को मंजूरी सीनेट की ओर से दी जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। कुछ शिक्षकों का कहना है कि पीयू के इतिहास में यह दिन दर्दभरा होगा, क्योंकि यहां लोकतंत्र की हत्या हो रही है।

बता दें चुनाव कराने के लिए आधे से अधिक सीनेटरों ने हर दर पर दस्तक दी लेकिन कहीं से भी उजाला नजर नहीं आया। सीनेटरों ने यह भी साफ कह दिया है कि चुनाव नहीं होता है तो पीयू को बड़ा नुकसान होगा। बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के जरिए राजनीति और होगी।
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मनमानी बढ़ेगी और एकतरफा फैसले लिए जाएंगे। मालूम हो कि सीनेट में 91 सदस्य होते हैं। 35 सदस्य मनोनीत होते हैं, जो चांसलर करते हैं। कुछ पदेन पदाधिकारी होते हैं। बाकी सदस्यों के लिए चुनाव होते हैं।

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सीनेट के चुनाव दो बार हुए स्थगित

पीयू सीनेट का चुनाव चार साल के लिए होता है। 31 अक्तूबर को चार साल पूरे हो जाएंगे। इससे पहले सीनेट के गठन का काम पूरा करना चाहिए था लेकिन बीच में ही चुनाव दो बार स्थगित कर दिए गए। जानकारों का कहना है कि चुनाव सितंबर माह में आसानी से हो सकते थे। पुटा के चुनाव भी बेहतर ढंग से करवाए गए लेकिन पीयू प्रशासन की मंशा कुछ और थी।

सीनेट के जरिए पीयू का संचालन होता है। देशभर से सदस्य चुनकर इसमें पहुंचते हैं और बेहतर से बेहतर निर्णय लिए जाते हैं। एकतरफा या मनमानी करने की गुंजाइश सीनेट में नहीं रहती। 100 साल से अधिक समय से सीनेट पीयू में कार्यरत है।

इसके चुनाव करवाने के लिए आधे से अधिक सीनेटरों ने यूटी प्रशासक, सलाहकार, डीसी, पंजाब सीएम, उपराष्ट्रपति आदि को पत्र भेजा लेकिन वहां से कोई भी सकारात्मक जवाब नहीं आया। हालांकि पीयू प्रशासन से जवाब तो मांगा गया था लेकिन चुनाव करवाने की मंशा कोविड के कारण नहीं है।

पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रकरण से पड़ी बोर्ड की नींव
केंद्रीय मंत्री व सांसदों के सामने सीनेट में कई बार हंगामा हुआ। कांग्रेस के एक गुट ने पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रकरण पर जिद पकड़ी और हाईकोर्ट प्रकरण को ले गए। उसी के साथ माहौल बदलता गया। जानकारों का कहना है कि इस प्रकरण के जरिये बोर्ड ऑफ गवर्नेंस की संभावनाएं बढ़ती गईं। हालांकि बोर्ड पीयू के लिए कितना फायदेमंद होगा, यह समय बताएगा।
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