पंजाब कैबिनेट ने ई-बिडिंग के जरिए नए सिरे से रेत खनन की बोली करवाने को मंजूरी दी है। इसका अकाली-भाजपा सरकार ने केंद्रीयकरण कर दिया था। इस फैसले से विपरीत बोली की प्रक्रिया द्वारा खदानों के ठेके देने केपहले अमल को समाप्त कर दिया गया है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि इससे सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के सूबे से रेत माफिया के सफाये के चुनावी वादे को पूरा किया गया है। इससे सरकार का राजस्व तीन सौ करोड़ बढ़ने की उम्मीद है।
इससे लोगों को रेत व बजरी की सप्लाई उचित कीमत पर बिना किसी अड़चन के हो सकेगी। कैबिनेट ने फैसला किया कि राज्य सरकार इस प्रणाली में और पारदर्शिता लाने को संगठित खननों और खनिज पदार्थ प्रबंधन प्रणाली को जल्द लागू करेगी। यह प्रणाली भारत सरकार द्वारा मंजूर की गई है, उड़ीसा में इसे सफलतापूर्वक लागू किया गया है। कैबिनेट ने जमीन मालिकों का मुआवजा पचास से साठ रुपये प्रति टन बढ़ाने का भी फैसला किया।
सीएम ने एक अप्रैल को खनन का जायजा लेकर नई नीति बनाने के निर्देश दिए थे, जिसके इस माह के अंत तक तैयार होने की संभावना है। प्रवक्ता ने कहा कि कानूनी खानें शुरू होने के बाद रेत-बजरी की कीमतों में गिरावट आएगी। सरकार खनन के लिए आधुनिक तकनीक विकसित करने और नियमों को सख्ती से लागू करने पर विचार कर रही है ताकि गैर कानूनी खदानों को पूरी तरह रोका जा सके।
विभाग द्वारा मुहैया आंकड़ों के मुताबिक 59 खानें बोली के लिए तैयार हैं, जिनमें बीस मई तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। 58 अन्य खानों का मामला पर्यावरण मंजूरी केलिए लंबित है, उनके अगस्त मध्य में चालू होने की संभावना है।