मोहाली के दपंति ने गोल्डन जुबनी पर देहदान का फैसला किया
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शादी की 50वीं सालगिरह पर मोहाली के बुजुर्ग दंपति ने बेहद चौंकाने वाला फैसला लिया। बेटा भी 25वीं सालगिरह पर ऐसा करेगा। दरअसल, इस दंपति ने चंडीगढ़ पीजीआई को देहदान करने का निर्णय लिया है। बुजुर्ग दंपति की इच्छा है कि मृत्यु के बाद उनका शरीर पीजीआई सौंपने के बाद ही अंतिम भोग की परंपरा निभाई जाए।
गौरतलब है कि यह घोषणा मूल रुप से रोपड़ वासी 68 वर्षीय मेवा सिंह धालीवाल और 65 वर्षीया उनकी धर्मपत्नी अजमेर कौर ने की है। वे वर्तमान में मोहाली स्थित पुलिस कांप्लेक्स फेज एक में अपने पुत्र जसबीर सिंह के साथ रहते हैं। बुधवार को यहीं पर बुजुर्ग दंपति मेवा सिंह धालीवाल और अजमेर कौर ने शादी की 50 वीं सालगिरह मनाई और देहदान करने का निर्णय लिया है।
इस बारे में जानकारी देते हुए मोहाली डीएसपी (डी) के रीडर जसबीर सिंह ने बताया कि उसके पिता मेवा सिंह धालीवाल पंजाब खेल विभाग में सुपरिटेंडेंट के पद से रिटायर हुए थे। उनका जन्म 18 सितंबर 1947 को गांव महरोलिया जिला रोपड़ में हुआ था। पिता ने शादी की 50 वीं सालगिरह पर निर्णय इसलिए है कि जब उनकी मौत हो तो तुरंत उनके शरीर को पीजीआई चंडीगढ़ को सौंपा जाए और साथ ही भोग डालकर रिश्तेदारों में लड्डू बांटें जाए।
जसबीर सिंह का कहना है कि वह अपने माता पिता के इस फैसले का सम्मान करते हैं और उन्हें अपने माता पिता पर गर्व है।
बेटे ने भी लिया देहदान का फैसला
पुलिस विभाग में कार्यरत जसबीर सिंह के मुताबिक उनके माता-पिता की तरह वह भी स्वयं देहदान करेंगे। उन्होंने बताया कि देहदान करने की औपचारिकता वह अपनी शादी की 25 वीं सालगिरह के अवसर पर पूरी करेंगे।
हमें खुशी है कि रिसर्च के लिए काम आ सकेगा शरीर
मेवा सिंह धालीवाल और अजमेर कौर के अनुसार उन्हें इस बात की खुशी है कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर पीजीआई के डाक्टरों के रिसर्च के लिए काम आ सकेगा।