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Chandigarh News: चंडीगढ़ को म्यूजियम नहीं, जिंदादिल शहर बनाएं अधिकारी

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चंडीगढ़। शहर में शेयर वाइज रजिस्ट्री बंद होने से शहर के लोग, संपत्ति मालिकों और उद्योगपतियों में भारी रोष है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से समझ कर प्रशासन ने पूरे शहर में रजिस्ट्री पर रोक लगा दी जबकि आदेश में ऐसा कहीं उल्लेख नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न सिर्फ प्रॉपर्टी मालिक अपनी ही संपत्ति बेचने का अधिकार खो बैठे हैं बल्कि इंडस्ट्री और कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को तुरंत ठोस और कानूनी हल निकालना चाहिए ताकि चंडीगढ़ की विकास गति थमी न रहे। इस मुद्दे पर अमर उजाला की तरफ से सेक्टर-9 स्थित कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी और प्रशासन से तत्काल समाधान निकालने की मांग की।
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अपनी ही संपत्ति को बेचने का अधिकार खो बैठे हैं लोगः हरपाल सिंह
चंडीगढ़ प्रॉपर्टी शेयर होल्डर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरपाल सिंह ने कहा कि गलत तरीके से पूरे चंडीगढ़ में शेयर वाइस रजिस्ट्री बंद की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहीं इसका जिक्र नहीं किया था। पूरा सेक्टर हेरिटेज कैसे हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट को भी मिस लीड किया गया है। डीसी ऑफिस की तरफ से जो कानूनी सलाह ली गई है, वह भी गलत है। उसी को आधार बनाकर पूरे शहर में शेयर अनुसार रजिस्ट्री बंद कर दी गई। इस कारण चंडीगढ़ के लोग संपत्ति का मालिक होते हुए भी अपनी ही संपत्ति को बेचने का अधिकार खो बैठे हैं।

हेरिटेज का अड़ंगा सिर्फ लोगों के कार्यों में ही क्योंः कमल गुप्ता
चंडीगढ़ प्रॉपर्टी कंसल्टेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल गुप्ता ने कहा कि जैसे-जैसे परिवार बढ़ता है। समय के साथ संपत्तियों का बंटवारा होता ही है, फिर कैसे किसी की निजी संपत्ति को हेरिटेज घोषित करके उसे बेचने या खरीदने से रोका जा सकता है। प्रशासन की तरफ से अपनी नई बिल्डिंग बनाई गई, अधिकारी दफ्तरों में बदलाव कर रहे हैं, उनके लिए हेरिटेज नहीं है। हेरिटेज का अड़ंगा सिर्फ लोगों के कार्यों में ही क्यों डाला जाता है। चंडीगढ़ की हालत यह है कि हाउसिंग बोर्ड, स्टेट ऑफिस, नगर निगम के नियम अलग-अलग है। अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं।
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प्रशासन को तत्काल हल निकालना चाहिएः हितेश पुरी
क्राफ्ड के चेयरमैन हितेश पुरी ने कहा कि शेयर वाइज रजिस्ट्री के मुद्दे पर एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में भी चर्चा की गई है। हर बार आश्वासन मिलता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी शेयर वाइज रजिस्ट्री बंद करने का जिक्र नहीं था। किसी व्यक्ति ने कई साल पहले कोई प्रॉपर्टी खरीदी, जब उस समय यह क्लॉज नहीं था तो अब प्रशासन के अधिकारियों ने पहले से आदेश को कैसे लागू कर दिया। उनके पास परेशान कई लोग आते हैं। वो बहुत परेशान हैं। प्रशासन को तत्काल इसका हल निकालना चाहिए।

सिंगापुर जैसा शहर बन सकता था चंडीगढ़ः दीपक गर्ग
डीएम एसोसिएट्स के दीपक गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ को म्यूजियम नहीं बनने देना चाहिए, अधिकारियों को इसे एक जिंदादिल शहर के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। शेयर वाइज रजिस्ट्री का बंद होना बड़ी समस्या है। इसका ठोस और कानूनी हल निकालना बहुत जरूरी है। यह समझ से परे है कि 75 साल पुराना चंडीगढ़ हेरिटेज कैसे हो सकता है। हेरिटेज की आड़ में प्रशासन ने कई पुराने और नामी थिएटरों को बंद कर दिया है। वे खंडहर हो गए हैं। वे निजी संपत्तियां हैं। चंडीगढ़ में क्षमता थी कि यह शहर सिंगापुर जैसा बन सकता था लेकिन पीछे जा रहा है। युवा बाहर जा रहे हैं। नेहरू ने भी चंडीगढ़ के उद्घाटन के समय अपने भाषण में कहा था कि यह भविष्य का शहर है।

नोटिस से परेशान, सील हो रहीं इंडस्ट्रियांः अरुण गोयल
उद्योगपति अरुण गोयल ने कहा कि प्रशासन की नीतियों से शहर की इंडस्ट्री और उसे चलाने वाले लोग बहुत ज्यादा परेशान है। रोजाना इंडस्ट्रियां सील हो रही हैं। 90 फीसदी उद्योगपति नोटिस झेल रहे हैं। उन्हें बांध दिया गया है। न काम कर पा रहे हैं, न बिजनेस को आगे बढ़ा पा रहे हैं। पड़ोस का मोहाली कहां से कहां पहुंच गया लेकिन चंडीगढ़ की तरफ जा रहा है। इंडस्ट्रियल एरिया में 30-40 फीसदी उद्योग ही रह गए हैं, बाकी पलायन कर गए हैं। यह शहर सिर्फ ट्रैफिक चालान के मामले में ही चालानगढ़ नहीं है, इंडस्ट्री के मामले में भी है क्योंकि रोजाना चालान काटे जाते हैं और बिल्डिंगों को सील किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि पूरा शहर हेरिटेज नहींः पवन कुमार
प्रॉपर्टी कंसल्टेंट पवन कुमार गुप्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को गलत समझ कर प्रशासन ने पूरे शहर में शेयर वाइज रजिस्ट्री बंद कर दी। इसकी वजह से लोग परेशान हो रहे हैं। अगर किसी व्यक्ति के तीन बच्चे हैं और उनमें से एक अपना हिस्सा बेचना चाहता है तो उसे ऐसा करने का पूरा अधिकार है। प्रशासन लोगों को कैसे रोक सकता है। अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि पूरा शहर हेरिटेज नहीं है। ऐसे में तत्काल सेक्टर-31 से आगे के इलाकों में शेयर वाइज रजिस्ट्री खोल देनी चाहिए।

आवाज उठाने वाले को भेजा जाता है नोटिसः भूपेंद्र शर्मा
प्रॉपर्टी कंसल्टेंट भूपेंद्र शर्मा ने कहा कि बहुत दुर्भाग्य की बात है कि चंडीगढ़ में कुछ भी सही नहीं हो रहा है। लोग बहुत ज्यादा दुखी हैं। जो भी आवाज उठाता है, उस समस्या को दूर करने के बजाय प्रशासन उसे ही तंग करने लगता है और नोटिस भेज दिया जाता है। ऐसा लग रहा है कि जानबूझकर एक साजिश के तहत चंडीगढ़ को पीछे किया जा रहा है जबकि यह शहर एक आधुनिक शहर है और उसमें काफी ज्यादा क्षमता है कि यह दुनिया के अन्य मशहूर शहरों के तर्ज पर विकसित हो सकता है।
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