चंडीगढ़ नगर निगम के अधिकारी अवैध वेंडर्स पर लगाम कसने में विफल साबित हो रहे हैं। कहीं पार्किंग को रेस्टोरेंट साइट बना दिया गया है तो सड़क पर बर्तन धोए जा रहे हैं। नो वेंडिंग जोन घोषित सेक्टर-17 में भी वेंडर्स बैठने लगे हैं। सेक्टरों में अचानक फूड वैन की संख्या बढ़ गई है। हर चौक पर आइसक्रीम तो मार्केटों में फालूदा बेचने वाली गाड़ियां खड़ी दिखाई दे रही हैं। यही हाल रहा तो ये शहर सिटी ब्यूटीफुल नहीं, वेंडर सिटी के नाम से जाना जाएगा।
स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के अनुसार दो या दो से अधिक सड़कों के किसी भी क्रॉसिंग, चौराहे या ट्रैफिक लाइट और प्रशासन की ओर से घोषित किसी भी विरासत संरचना (हेरिटेज स्ट्रक्चर) से 50 मीटर के भीतर किसी वेंडिंग की मंजूरी नहीं है। स्थिति इससे विपरीत है। लगभग हर चौक पर आइसक्रीम बेचने वाले देखे जा सकते हैं। फालूदा की गाड़ियां, चंडीगढ़ में नया ट्रेंड हैं। इनकी मंजूरी नहीं है, फिर भी ये शहरभर में घूमते हैं और सेक्टर-19, 32, 34 धनास समेत कई जगहों पर खड़े नजर आते हैं, जबकि नियम स्पष्ट है कि वी1, वी2 और वी3 सड़कों पर किसी भी वेंडर को जाने की अनुमति नहीं है।
सेक्टर-17 तो नो वेंडिंग जोन है लेकिन हर शाम को नीलम थिएटर के पास बैग, जूतियां, महिलाओं के सजने का सामान, गोलगप्पे आदि की दुकानें सज रही हैं। क्या ये इंफोर्समेंट विंग के अधिकारियों को नजर नहीं आते। रॉक गार्डन के पास भी वेंडर्स हैं। एनफोर्समेंट विंग पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। पार्षद आरोप लगा रहे हैं कि शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है।
यह हाल पहले कभी नहीं था, किसकी मिलीभगत हैः हरदीप सिंह
मंगलवार को हुई सदन की बैठक में अवैध वेंडर्स का मुद्दा गूंजा था। अकाली पार्षद हरदीप सिंह सबूत के साथ पहुंचे थे। फूड ट्रक की फोटो दिखाते हुए उन्होंने पूछा था कि निगम में कौन इन्हें खड़े होने की इजाजत दे रहा है, जबकि ये पूरी तरह से अवैध हैं। उन्होंने कहा कि शहर का यह हाल पहले कभी ऐसा नहीं था, जैसा कि अब बन गया है। इसमें किसकी मिलीभगत है, उनकी पहचान की जानी चाहिए। इसके बाद पार्षद सौरभ जोशी, प्रेमलता, सचिन गालव, दमनप्रीत, जसबीर बंटी, गुरबक्श रावत समेत कई पार्षदों ने निगम के अधिकारियों को घेरा। संयुक्त आयुक्त पवित्र सिंह ने जवाब दिया कि यह गाड़ियां रात 8 बजे के बाद लगती हैं। उस वक्त तक इंफोर्समेंट विंग के कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं होते। इस जवाब पर भी बवाल हो गया। बताया गया कि तस्वीरें दिन की हैं। पार्षदों ने यहां तक कह दिया कि कर्मी 8 बजे तक ड्यूटी पर रहते हैं यानी उसके बाद कुछ भी करने की आजादी है।
जुलाई 2020 में हुए संशोधन से बिगड़ी स्थिति
स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट-2018 के अनुसार एसेंशियल सर्विस प्रोवाइडर (ईएसपी) सिर्फ दूध, ब्रेड व चाय, नाई, साइकिल/रिक्शा ठीक करने, धोबी/प्रेस करने का ही काम कर सकते थे लेकिन जुलाई 2020 में इन नियमों में संशोधन किया गया। ईएसपी वेंडर्स को तंदूर, छोले भटूरे, छोले कुलचे, पराठा, फल और सब्जियां आदि बेचने की भी मंजूरी दे दी गई। इस संशोधन की वजह से ही स्थिति खराब हुई।
पार्षद सौरभ जोशी ने भी इस पर सवाल उठाया है। उन्होंने सदन में कहा कि पहले सर्वे कर वेंडर्स को वेंडिंग जोन में भेजा। दूसरी ओर ईएसपी और नॉन-ईएसपी का लाइसेंस देकर कुछ को मार्केट में बिठा दिया। ये दो प्रकार के कानून गलत हैं इसलिए वेंडिंग साइट नहीं चल रहीं। जिस अधिकारी ने ईएसपी को लेकर 2019 से 2022 तक लाइसेंस बांटे हैं। उससे सवाल पूछा जाए और सदन की अगली बैठक में इसकी रिपोर्ट लाई जाए। उस अधिकारी पर अगर कार्रवाई नहीं होगी तो वह अगली बार सदन के वेल में आकर बैठेंगे।
पुलिस की तरह 24 घंटे हो ड्यूटी तब होगा सुधार
अवैध वेंडर्स पर सत्ता पक्ष और विपक्ष की राय एक है। विपक्ष की कार्रवाई की मांग पर सीनियर डिप्टी मेयर कंवरजीत सिंह राणा ने यहां तक कह दिया कि अब अगर किसी के वार्ड में ये फूड ट्रक दिखे तो उस एरिया के इंफोर्समेंट अधिकारी को सस्पेंड कर देना चाहिए। पार्षद गुरबक्श रावत ने कहा कि अब समय बदल चुका है। दुकानें 24 घंटे खुल रही हैं, इसलिए इंफोर्समेंट विंग को भी पुलिस की तरह 24 घंटे काम करना चाहिए तभी वेंडर की समस्या दूर हो सकती है। मेयर ने भी इस पर सहमति जताई और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह इसे गंभीरता से देखें।
एक नजर में निगम का इंफोर्समेंट विंग
विंग में 13 सब-इंस्पेक्टर, दो इंस्पेक्टर और एक सुपरिटेंडेंट हैं। ये सभी संयुक्त आयुक्त पवित्र सिंह को रिपोर्ट करते हैं। प्रत्येक सब-इंस्पेक्टर के पास सामान जब्त करने के लिए एक ट्रक और पांच से छह लेबर होते हैं। जो सामान जब्त किए जाते हैं, उन्हें इंडस्ट्रियल एरिया के स्टोर में रखा जाता है।
शहर की सूरत को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। अवैध वेंडर्स की समस्या पर काबू पाने के लिए मैंने इंफोर्समेंट विंग के कर्मियों की ड्यूटी को शिफ्टों में 16 घंटे करने के निर्देश दिए हैं। 24 घंटे करने की पार्षदों की मांग की भी स्टडी की जा रही है।
- अनूप गुप्ता, मेयर