शहर के एक व्यक्ति ने कई साल पहले लाखों रुपये की लागत से पुडा/गमाडा से एक एमआईजी सुपर फ्लैट खरीदा। लेकिन अभी तक व्यक्ति को फ्लैट नहीं मिल पाया है। अब वह व्यक्ति विदेश में है।
लेकिन शहर में कोई घर न होने से उसका देश आने का सपना भी अधूरा रह गया लगता है। गमाडा की कार्रवाई से दुखी होकर व्यक्ति ने एनआरआई सेल को ईमेल से शिकायत भेजी है। साथ ही मामले में इंसाफ की गुहार लगाई है।
एनआरआई अमरवीर सिंह रेखी ने अपनी शिकायत में कहा है साल 1998 में उसे एमआईजी-सुपर फ्लैट अलॉट हुआ था। लेकिन बिना नोटिस दिए उसका फ्लैट संबंधित विभाग ने किसी और को अलॉट कर दिया। अब उनके फ्लैट पर दंगा पीड़ित का कब्जा है।
कब्जाधारक की दलील है कि उसे दंगा पीड़ित कोटे के तहत प्लॉट अलॉट हुआ है। जबकि नियमों मुताबिक दंगा पीड़ित कोटे में किसी व्यक्ति को एमआईजी-सुपर फ्लैट अलॉट नहीं हो सकता है। उन्होंने इस बारे में पुडा व गमाडा के सभी अधिकारियों को पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि सेक्टर 70 में फ्लैट अलाट किया गया। फ्लैट की 25 प्रतिशत भुगतान भी कर दिया था। लेकिन जब फ्लैट में गए तो फ्लैट में कई कमियां देखी।
उन्होंने पुडा अधिकारियों को कमियां दूर करने के लिए कहा। उस समय के अधिकारी ने फ्लैट की चाबी रख ली। साथ ही जल्दी स्थिति सुधारने का भरोसा दिया। जब वह कई दिनों बाद फ्लैट में गए, तो वहां पर दंगा पीड़ित का कब्जा था।
रेखी ने बताया कि जब उन्होंने पुडा आफिस जाकर पता किया तो अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनका फ्लैट कैंसिल कर दिया गया है। लेकिन उसे इस संबंधी कोई सूचना नहीं दी गई। 16 वर्ष बीत जाने के बाद उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं दिया जा रहा है।