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ब्लैक फंगस: शुगर मरीजों में कोरोना ढा रहा कहर, चंडीगढ़ पीजीआई पहुंचे 20 मरीज

Thu, 13 May 2021 01:43 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

यह एक तरह का दुर्लभ फंगस है। आमतौर पर इसे ब्लैक फंगस के नाम से जाना जाता है, लेकिन पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट का कहना है कि ब्लैक फंगस एक अलग कैटेगिरी का फंगल है। पीजीआई में भी कोविड के साथ म्यूकरमाइकोसिस होने के मरीज आ रहे हैं। अब तक कुल 20 से ज्यादा मरीज पहुंचे हैं।
 
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चंडीगढ़ में भी ब्लैक फंगस - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने मरीजों के साथ चिकित्सकों की भी चिंता बढ़ा दी है। कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई मरीजों को दूसरी गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। कोरोना की चपेट में आने वाले लोग अब म्यूकरमाइकोसिस नामक बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं। यह एक तरह का दुर्लभ फंगस है। आमतौर पर इसे ब्लैक फंगस के नाम से जाना जाता है, लेकिन पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट का कहना है कि ब्लैक फंगस एक अलग कैटेगिरी का फंगल है। पीजीआई में भी कोविड के साथ म्यूकरमाइकोसिस होने के मरीज आ रहे हैं। अब तक कुल 20 से ज्यादा मरीज पहुंचे हैं।

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पीजीआई के मुताबिक, चिकित्सीय भाषा में इसे कैम कहते हैं। यह उन लोगों में ज्यादा हो रहा है, जो कोरोना के साथ डायबिटीज से पीड़ित हैं और इलाज के दौरान उन्हें स्टेरॉयड दिया गया है। इसके इलाज में दो बड़ी बाधाएं आ रही हैं। पहला, महंगा इलाज और दूसरा, एंटी फंगल दवाओं की कमी। यह भी देखा गया है कि कोरोना से लोग ठीक हो गए, लेकिन म्यूकरमाइकोसिस होने के बाद उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। पीजीआई के अनुसार, यह एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है और न ही आक्सीजन व पानी से। वातावरण में हवा के माध्यम से सांस के अंदर जाता है।

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कैसे बच सकते हैं म्यूकरमाइकोसिस से

मधुमेह पीड़ित व कोरोना से ठीक मरीज ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें।
स्टेरॉयड के इस्तेमाल में समय और डोज का पूरा ध्यान रखें
स्टेरॉयड देते समय ब्लड शुगर की निगरानी रखें
मास्क पहनें और निर्माणाधीन साइट पर जानें से बचें
कोरोना ठीक होने के बाद यदि चेहरे पर दर्द, नाक बंद होना, दांत का ढीला होना या दर्द होना, छाती में दर्द, सांस लेने में दिक्कत व पलकों में सूजन आए तो डाक्टर से संपर्क करें

शरीर के किन हिस्सों में डालता है प्रभाव
यह दिमाग, फेफड़े या त्वचा पर भी अटैक कर सकता है। इस बीमारी में कई मरीजों के आंखों की रोशनी जा चुकी है। कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी के गलने की भी शिकायतें आई हैं। इसके अतिरिक्त भी तमाम दूसरी परेशानियां हैं। अगर समय रहते इसे नियंत्रित न किया जाए तो इससे मरीज की मौत भी हो सकती है।

भारत में पहले से ही यह बीमारी ज्यादा थी, कोरोना ने इसे ढाई गुना बढ़ाया
इस गंभीर बीमारी की गहनता से अध्ययन करने वाले पीजीआई माइक्रोबायोलाजी डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो. अरुणालोके चक्रवर्ती ने बताया कि भारत में पहले से ही म्यूकरमाइकोसिस की बीमारी काफी ज्यादा है। कोरोना की वजह से यह ढाई गुना बढ़ गई है। इसके बढ़ने के दो विशेष कारण हैं। पहला, अनियंत्रित डायबिटीज और कोरोना पीड़ित मरीजों को ज्यादा मात्रा और ज्यादा दिनों तक स्टेरॉयड देना। म्यूकस बाहरी वातावरण के साथ घर के अंदर भी है। जब भी शुगर की मात्रा अनियंत्रित होती है तो म्यूकस शरीर के अंदर चला जाता है।

मरीजों को चाहिए कि कोरोना ठीक होने के बाद यदि उनकी आंखों में धुंधलापन, चेहरे में दर्द या कोई दूसरी शरीर में परेशानी दिख रही है तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए। जितनी जल्दी इसका पता चलेगा, उतना अच्छा इलाज उपलब्ध हो सकेगा। इसका इलाज डाक्टरों की एक टीम करती है। इसमें ईएनटी, नेत्र विशेषज्ञ, न्यूरोसर्जन, माइक्रोबायोलाजिस्ट व अन्य डाक्टर मिलकर इसका इलाज करती है।
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