हरियाणा में पारित अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधन अधिनियम को लेकर प्रदेश सरकार और केंद्र आमने-सामने आ गए हैं। केंद्रीय गृह सचिव ने शुक्रवार को पत्र लिखकर एचएसजीपीसी को गैरकानूनी बताते हुए हरियाणा सरकार से अधिनियम वापस लेने का अनुरोध किया है।
वहीं राज्य सरकार ने गृह सचिव के पत्र को दरकिनार करते हुए न सिर्फ इसे हास्यास्पद करार दिया है, बल्कि कहा है कि सोचा जाएगा कि पत्र का जवाब देने योग्य है या नहीं। हरियाणा के मुख्य सचिव एससी चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र के पत्र में प्रदेश सरकार से राज्यपाल को सलाह देने के लिए कहा गया है, जो मुख्य सचिव के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
मुख्य सचिव ने हैरानी जताते हुए कहा कि केंद्रीय गृह सचिव कैसे ऐसा पत्र लिखकर विधायिका और राज्यपाल के निर्णय पर सवाल खड़ा कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि अब देखना होगा कि केंद्र सरकार का यह पत्र जवाब देने योग्य है या नहीं। क्योंकि, कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक, यदि एक बार किसी बिल पर राज्यपाल के हस्ताक्षर हो गए तो उसे वापस नहीं लिया जा सकता। कोई अन्य राज्यपाल भी ऐसे बिल वापस नहीं ले सकता। यह संवैधानिक मामला है।
कानूनी राय के बाद लाए थे सदन में प्रस्ताव
मुख्य सचिव के मुताबिक, विधानसभा में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन अधिनियम 2014 लाने से पहले सरकार ने कानूनी राय ली थी। पंजाब पुनर्गठन एक्ट 1966 की धारा 72 में इसका प्रावधान है।
इसके तहत बिल पास कर राज्य की अलग गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (एचएसजीपीसी) बनाई जा सकती है। यदि कानूनी राय तर्क संगत नहीं होती तो राज्य सरकार किसी तरह का रिस्क नहीं लेती।
मुख्य सचिव ने कहा कि अधिनियम पर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद यह विकल्प भी अपनाने लायक नहीं हैं, कि- बिल में संशोधन किया जाए और संशोधन विधेयक विधानसभा में पेश किया जाए
- विधानसभा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर उस बिल के लिए दोबारा अपील करे
- विधानसभा द्वारा इस बिल की स्वीकृति रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया जाए
पत्र में 1925 और 1966 एक्ट का हवाला
केंद्रीय गृह सचिव ने हरियाणा सरकार को एचएसजीपीसी संबंधी अधिनियम वापस लेने के संदर्भ में जो पत्र लिखा है, उसमें कहा गया है कि-
- केंद्र सरकार के संज्ञान में आया है कि हरियाणा विधानसभा ने 11 जुलाई को हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन विधेयक पास किया है। इसे 14 जुलाई को हरियाणा के राज्यपाल ने अनुमति प्रदान कर दी है। इस विषय में राष्ट्रपति से विचार और सहमति नहीं की गई। इस मामले में केंद्र ने अटार्नी जनरल की राय मांगी है।
- आजादी से पहले का सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 अविभाजित पंजाब के समय से ही लागू है। आजादी के बाद भी अविभाजित पंजाब में यह एक्ट लागू रहा है। 1966 में हरियाणा गठन के समय पंजाब रि-आर्गेनाइजेशन एक्ट संसद से पारित होने के बाद हरियाणा अलग हो गया। 1925 के एक्ट के तहत कवर होने वाले गुरुद्वारे पंजाब सहित हरियाणा व हिमाचल में भी हैं और तभी से इनका प्रबंधन बोर्ड (एसजीपीसी) के पास है। इस मामले में किसी तरह का कानून पारित करने का हक संसद को है।
केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी के मुताबिक जब पहले से 1925 का कानून मौजूद है तो उसी विषय पर दोबारा कानून पारित करने का औचित्य नहीं है। हरियाणा सरकार को यह तथ्य राज्यपाल के संज्ञान में लाकर उनसे यह अनुमति वापस लेने की मांग करनी चाहिए। राज्य विधानसभा द्वारा पारित किया गया बिल निरर्थक है।