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अब डाकघरों में भी जमा हो सकेंगे बिजली बिल, हरियाणा सरकार ने लिया बड़ा फैसला

Wed, 02 Sep 2020 12:35 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • एक सितंबर से ही यह व्यवस्था लागू मानी जाएगी
  • बिजली उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए सरकार का फैसला
  • प्रदेश में डाकघर की 2964 शाखाएं, 2180 ग्रामीण क्षेत्र में
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा में बिजली उपभोक्ता अब डाकघरों में भी बिल जमा करवा सकेंगे। ये व्यवस्था एक सितंबर से लागू मानी जाएगी। बिजली उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए सरकार ने ये फैसला लिया है। इसके अलावा, वर्तमान में हरियाणा के 60 प्रतिशत से अधिक बिजली उपभोक्ता अपने बिजली बिलों की अदायगी ऑनलाइन कर रहे हैं।

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ग्रामीण क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डाक विभाग से सरकार ने इस संदर्भ में बातचीत की थी। जिसके बाद यह निर्णय हुआ कि अब बिजली उपभोक्ता डाकघर की शाखा में भी अपने बिजली बिल जमा कर सकते हैं। हरियाणा में डाकघर की 2964 शाखाएं हैं जिनमें से 2180 शाखाएं ग्रामीण क्षेत्रों में हैं।

डाकघरों के काउंटरों पर 20 हजार रुपये तक के बिजली बिलों का भुगतान किया जा सकेगा। इसके लिए उपभोक्ताओं से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और जमा की गई राशि उसी समय बिजली निगमों के सर्वर पर अपडेट हो जाएगी। कोरोना के खतरों को भांपते हुए ग्रामीण क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को बिजली बिल की अदायगी के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए वे अपने गांव और मोहल्ले के डाकघर में आसानी से अपने बिजली बिल की अदायगी कर सकते हैं। 

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बिजली वितरण निगमों के मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) शत्रुजीत कपूर ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले यमुनानगर और अंबाला (पंचकूला) सर्कलों में डाकघर काउंटर से बिजली बिल का भुगतान आरंभ करने की शुरुआत करने के निर्देश दिए। इन दोनों सर्कलों के सकारात्मक नतीजों को देखते हुए 1 सितंबर 2020 से यूएचबीवीएन ने विशेष तौर पर ग्रामीण क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं के लिए डाकघरों के काउंटर पर बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध करवा दी गई है। 

साथ ही डीएचबीवीएन के बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह सुविधा जल्द शुरू हो जाएगी। सीएमडी शत्रुजीत कपूर ने बताया कि तीन वर्षों से यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन ने लाभ कमाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वित्त वर्ष 2019-20 में दोनों निगमों ने 29519 करोड़ 74 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त किया। इससे 331 करोड़ 39 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है। यूएचबीवीएन और डीएचबीवीएन ने 2018-19 में 29962 करोड़ 34 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। 

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