हरियाणा की जेलों में बंद कैदियों को अब बेटी की शादी के लिए 96 घंटे पैरोल मिलेगी। वहीं, बेटे की शादी के लिए पैरोल की अवधि बढ़ाकर 72घंटे हो जाएगी।
कैदियों की पूर्व रिहाई के मामले में बुधवार को हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में पेश हलफनामे में कहा कि हरियाणा बिल प्रिजनर गुड कंडक्ट बिल संशोधन के लिए विधानसभा को भेज दिया गया है।
चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित खंडपीठ ने हलफनामे को रिकार्ड में लेकर मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। मामले की अगली सुनवाई 22 मार्च के लिए निर्धारित की गई है।
हाईकोर्ट में पेश हलफनामे में हरियाणा सरकार ने जानकारी दी कि कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कैदियों के बारे में पॉलिसी तैयार करने के लिए 17 दिसंबर और 22 जनवरी को एक मीटिंग आयोजित की गई।
इस मीटिंग के बाद हरियाणा विधानसभा को 21 फरवरी को हरियाणा प्रिज़नर गुड कंडक्ट बिल संशोधन हेतू भेजा जा चुका है।
इस बिल को मंजूरी के बाद किसी भी कैदी को अब उसकी बेटी की शादी के लिए 48 घंटों की बजाय 96 घंटे के लिए पैरोल मिल पाएगी।
इसके अलावा बेटे की शादि के लिए भी अवधि को बढ़ा कर 72 घंटे कर दिया गया है। इसके साथ ही गंभीर मामलों में सजा काट रहे कैदियों को टैंपरेरी रिलीज केवल तभी मिल पाएगी जब उनकी पांच साल की सजा पूरी हो जाएगी।
इस पांच वर्ष की अवधि में ट्रायल का समय शामिल नहीं होगा। अन्य प्रकार के मामलों में सजा काटने वाले कैदियों को सजा होने के एक साल बाद पैरोल मिल पाएगी।
इसके अलावा छुट्टी केवल तभी मिल पाएगी जब कैदी ने तीन वर्ष जेल में बिताए हों। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी द्वारा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर यह मामला उठाया है।