याची ने कहा कि सरकार का मानना है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही प्रोबेशन अवधि को पूर्ण मान सेवा को नियमित माना जाता है जबकि यह शर्त नियुक्ति पत्र एवं नियमों के विरुद्ध है व पूर्णत: अवैध है। नियुक्ति पत्र में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि प्रोबेशन कंफर्म के लिए प्रशिक्षण पूरा करना आवश्यक है। याचिका के अनुसार नियम 10 को पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि सेवा आरंभ करने वाला पूर्ण कर्मचारी के रूप में सेवा में शामिल किया गया है। प्रशिक्षण पूरा होने से पहले की याचिकाकर्ता की सेवा अवधि को जोड़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता।
याची ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय खेल में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें राज्य सरकार ने 2007 में डीएसपी नियुक्त किया था। चार सितंबर 2007 के नियुक्ति पत्र में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि वह दो साल की अवधि के लिए प्रोबेशन पर रहेंगे, जिसमें प्रशिक्षण की अवधि आदि शामिल होगी।
याची ने कहा कि इसके अनुसार वह पांच अक्तूबर, 2009 को डीएसपी के पद पर कंफर्म होने के हकदार थे, या अधिकतम इसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता था। याची ने बताया कि उसे नौ जनवरी 2014 से कंफर्म किया गया, जो छह साल और तीन महीने की अवधि के बाद है। याची ने अपील की कि उसे 2009 से कंफर्म करने का आदेश दिया जाए और इससे होने वाले वरिष्ठता और पदोन्नति आदि अन्य सभी लाभ प्रदान किए जाएं। हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया कि 2021 की चयन सूची के लिए आईपीएस पद पर पदोन्नति इस याचिका के अंतिम फैसले पर निर्भर होगी।