रेप पीड़िता गर्भवती नाबालिग की ओर से अपने गर्भपात के लिए दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने एम्स को नोटिस जारी किया। हरियाणा की एक नाबालिग दुराचार पीड़िता की ओर से अपने गर्भपात के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से आज्ञा मांगी गई है।
पीड़िता और उसके पिता की तरफ से दायर याचिका पर जस्टिस परमजीत सिंह धालीवाल ने आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) को आदेश दिए हैं कि वह पीड़िता के गर्भपात के लिए हरसंभव कोशिश करें। इसके साथ ही जस्टिस धालीवाल ने हरियाणा सरकार को पीड़िता के इलाज के लिए तुरंत एम्स को 50 हजार रुपये जारी करने और पीड़िता को हर महीने पांच हजार रुपये देने के अलावा पांच लाख रुपये मुआवजा राशि भी जारी करने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई सात जुलाई को होगी
जस्टिस धालीवाल ने एम्स को यह निर्देश भी दिया है कि वह पीड़िता से पूरी सहानुभूति के साथ पेश आएं। उसके लिए इलाज के लिए अलग कमरे का प्रबंध हो। उल्लेखनीय है कि इस तरह के मामलों में विभिन्न मेडिकल बोर्ड यह राय दे चुके हैं कि 20 हफ्ते से अधिक समय बीतने के बाद गर्भपात घातक है। ताजा मामले में नाबालिग पीड़िता के गर्भधारण को 20 हफ्ते से ज्यादा समय बीत चुका है।
इसे ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने एम्स के निदेशक से कहा है कि चूंकि मेडिकल साइंस तरक्की पर है। एम्स को विशेषज्ञ डॉक्टरों का बोर्ड गठित कर ऐसी संभावनाएं तलाशनी चाहिए, ताकि गर्भपात कराया जा सके। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर गर्भपात संभव न हो और पीड़िता अपने बच्चे को अपनाना नहीं चाहती तो बच्चे को सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) गोद लेकर उसका पालन-पोषण करे, जिसका पूरा खर्च हरियाणा सरकार को उठाना होगा।