यूटी प्रशासन की ओर से शहर के लोगों को अपने घरों पर सोलर वाटर हीटिंग सिस्टम लगाने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया गया है। यूटी प्रशासन ने यह फैसला केंद्रीय नवीन न नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय की ओर से सब्सिडी बंद करने के बाद लिया है।
अभी तक यूटी के साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग की ओर से सोलर वाटर हीटिंग सिस्टम की कुल लागत पर 30 फीसदी सब्सिडी दी जाती थी। जबकि 25 फीसदी सब्सिडी मंत्रालय की ओर से दी जाती थी। जब मंत्रालय ने सब्सिडी बंद की तो प्रशासन ने भी सब्सिडी बंद कर दी।
हालांकि सोलर पॉवर फोटोवोल्टिक प्लांट लगाने पर लोगों को पहले की तरह 30 फीसदी सब्सिडी मिलेगी। केंद्र सरकार ने लगभग दो साल पहले चंडीगढ़ को मॉडल सोलर सिटी बनाने की योजना को मंजूरी दी थी। मॉडल सोलर सिटी बनाने के उद्देश्य से ही प्रशासन सोलर वाटर हीटिंग सिस्टम या सोलर पॉवर फोटोवोल्टिक प्लांट लगाने पर लोगों को सब्सिडी दे रहा था ताकि अधिक से अधिक लोग अपने घरों की छतों पर इसे लगाएं।
अब सब्सिडी बंद किए जाने से प्रशासन को चंडीगढ़ को सोलर सिटी बनाने में दिक्कत आ सकती है। हालांकि प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार सब्सिडी इसलिए बंद की गई है क्योंकि सोलर वाटर हीटिंग सिस्टम का रेट काफी कम हो गया है और आम आदमी अब इसे आसानी से खरीद पा रहे हैं।
ध्यान रहे कि चंडीगढ़ के मॉडल सोलर सिटी बनने से शहर की इमारतों और स्ट्रीट लाइट्स के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रशासन सौर ऊर्जा के माध्यम से वर्ष 2018 तक 500 मिलियन यूनिट बिजली बचाना चाहता है। प्रशासन ने सोलर सिटी बनाने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर लिया है।
चंडीगढ़ रिन्युअल एनर्जी साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी (करेस्ट), डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट, नगर निगम और वन विभाग व अन्य एजेंसियों की तरफ से भी इस प्रोजेक्ट में सहयोग किया जा रहा है। यूटी सचिवालय सहित शहर की कई सरकारी इमारतों में सोलर फोटोवोल्टिक पॉवर प्लांट लग चुका है जहां से हर रोज लगभग 185-200 यूनिट (किलोवाट प्रतिघंटे) बिजली का उत्पादन हो रहा है।