हरियाणा की अलग सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के लिए तैयार किए जा रहे विधेयक में प्रावधान किया जा रहा है कि सभी ऐतिहासिक, अधिसूचित या स्थानीय गुरुद्वारों की आय इन्कम टैक्स और प्रापर्टी टैक्स से मुक्त रहेगी और अन्य स्थानीय करों, सेस से गुरुद्वारा फंड मुक्त रहेगा।
प्रस्तावित विधेयक के चैप्टर सात में इसका प्रावधान करते हुए एचएसजीपीसी एक्ट के तहत बनाए जाने वाले नियमों और गुरुद्वारों की संपत्ति, पुराने विवाद और अन्य बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट की गई है। हरियाणा सिख गुरुद्वारा एक्ट को दूसरे कानूनों से ऊपर रखा गया है।
हरियाणा सीमा में लागू हो जाएंगे एक्ट के कानून
मसौदे में लिखा है,जिस दिन से कमेटी गठित हो जाएगी, उसी दिन से सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 के प्रावधान या अन्य किसी कानून या उनके तहत बने नियम लागू होने बंद हो जाएंगे और हरियाणा सिख गुरुद्वारा एक्ट के कानून हरियाणा सीमा में लागू हो जाएंगे।
इस स्थानीय और विशेष एक्ट होगा जिसके कारण सभी कानूनों पर ज्यादा प्र्रभाव रखेगा। पुरानी नियुक्तियां और उनके नियम तब तक प्रभावी रहेंगे जब तक उन्हें बदल या संशोधित नहीं कर दिया जाता।
पंजाब सिख गुरुद्वारा बोर्ड से संबंधित हरियाणा सीमा में सब गुरुद्वारों की चल और अचल संपत्ति हरियाणा का एक्ट बनने के तुरंत बाद हरियाणा की कमेटी या बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में हो जाएगी।
किराये समेत सारी धन रशि या पैसा कमेटी के अधिकार क्षेत्र में आ जाएगा। पुराने सब विवाद हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी लड़ेगी। हरियाणा रेंट (कंट्रोल एंड एविक्शन) एक्ट, 1973 कमेटी या बोर्ड के अधिकार वाले गुरुद्वारों की अचल संपत्ति पर लागू नहीं होगा।
कमेटी के सदस्य पब्लिक सर्वेंट होंगे
प्रस्तावित मसौदे में प्रावधान किया गया है कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, कार्यकारी बोर्ड या किसी अन्य सब कमेटी का सदस्य और कमेटी का कर्मचारी पब्लिक सर्वेंट की श्रेणी में माना जाएगा। इन सदस्यों के खिलाफ आधिकारिक रूप से किए किसी भी फैसले के कारण किसी भी प्रकार का मुकदमा नहीं चलाया जा सकेगा।