कई साल से चले आ रहे एनआरआई सम्मेलन को अब पंजाब सरकार अलविदा कहने जा रही है। इन सम्मेलनों की जगह एनआरआई संगत दर्शन आयोजित किए जाएंगे। यह फैसला एनआरआई से मिले फीडबैक के आधार पर किया गया है।
एनआरआई मामलों के मंत्री तोता सिंह ने बताया कि उन्होंने यूएस और कनाडा का दौरा किया। वहां रह रहे पंजाबियों केसाथ छह बैठकें कीं। इस दौरान एनआरआई की राय थी कि उनके मसले हल करने के लिए सरकार संगत दर्शन आयोजित करे। अब दिसंबर और जनवरी में मोगा, लुधियाना और जालंधर में संगत दर्शन आयोजित किए जाएंगे।
मोगा में सात जिलों और लुधियाना-जालंधर में छह-छह जिलों के एनआरआई को बुलाया जाएगा। पहले ही एनआरआई लोगों की समस्याओं से संबंधित आवेदन लेकर डीसी को भेज दिए जाएंगे। तीनों संगत दर्शन कार्यक्रमों की प्रधानगी सीएम प्रकाश सिंह बादल करेंगे। इस दौरान मौके पर ही समस्याएं निपटाई जाएंगी।
‘गुमराह कर रहे हैं मनप्रीत बादल’
एनआरआई मामलों के मंत्री ने पीपीपी प्रमुख मनप्रीत बादल के एनआरआई सम्मेलन के विफल होने संबंधी बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया जताई। तोता सिंह ने कहा कि मनप्रीत झूठे बयान देकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने एनआरआई के लिए 15 थाने बनाए, जालंधर में कोर्ट स्थापित की, प्लॉटों में दस फीसदी आरक्षण रखा, 38 एनआरआई नंबरदार नियुक्त किए। एनआरआई की प्रॉपर्टी खाली करवाने को कानून में संशोधन किया, विदेश भेजने के नाम पर ठगी रोकने को कानून बनाया।
तोता सिंह ने कहा कि एनआरआई के 72 प्रतिशत विवाद पारिवारिक होते हैं, 15 फीसदी वैवाहिक विवाद और 12-13 प्रतिशत फौजदारी मामले होते हैं। गलत ढंग से पीओ करार दिए एनआरआईज के संबंध में आईजी की अगुवाई में कमेटी बनाई जा रही है।
हर जिले में एक कमेटी बनेगी, जिसमें दो एनआरआई, एक-एक पार्षद, समाजसेवी और नायब तहसीलदार होगा। यह कमेटी थानों में चल रहे मामलों की पैरवी करेगी। उन्होंने कहा कि एनआरआई द्वारा भेजी रकम पर सर्विस टैक्स लगाने के खिलाफ वह जल्द पंजाब के सांसदों के साथ वित्तमंत्री को मिलेंगे।