डॉ. जगतराम
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पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों को साल में दो बार छुट्टियां मिलती हैं। गर्मियों में एक महीने और सर्दियों में 15 दिन की। संस्थान के हर डॉक्टर छुट्टी लेते हैं। छुट्टी लेने के पीछे तर्क दिया जाता है कि संस्थान के डॉक्टर साल भर टीचिंग, ओपीडी और रिसर्च में जुटे रहते हैं। उन पर काम का बोझ ज्यादा होता है। छुट्टी लेना उनके अधिकार में भी शामिल है लेकिन पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम छुट्टी नहीं लेते हैं। वे विंटर विकेशन के दौरान ड्यूटी पर रहते हैं। ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर को अटेंड करते हैं।
पीजीआई में गर्मी व सर्दी की छुट्टी दो चरणों में होती है। आधे डॉक्टर पहले चरण में छुट्टी पर लेते हैं, जबकि आधे दूसरे चरण में ताकि पीजीआई का काम प्रभावित न हो और मरीजों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। पीजीआई में विंटर वेकेशन सात दिसंबर से शुरू हुई है, जो छह जनवरी तक जारी रहेगी। डॉक्टरों को छुट्टियां इसलिए दी जाती है ताकि वे अपने आपको थोड़ा फ्रेश फील कर सकें लेकिन प्रो. जगतराम छुट्टियों पर जाने की बजाय काम करते रहने से अपने आपको तरोताजा पाते हैं।
उनके पास सिर्फ पीजीआई नहीं बल्कि दूसरे संस्थान का भी चार्ज है। एडवांस आई सेंटर, रायबरेली एम्स, बठिंडा एम्स व बिलासपुर एम्स की जिम्मेदारी भी उनके पास है। एमसीआई के बोर्ड आफ गवर्नेंस के सदस्य भी हैं। प्रो. जगतराम ने बताया कि जब से वे डायरेक्टर के पद पर आएं हैं, तब से एक भी वेकेशन नहीं ली है। डायरेक्टर बने उन्हें तीन साल बीत चुके हैं। वे छुट्टी तभी लेते हैं, जब उन्हें इमरजेंसी की वजह से कहीं जाना पड़ जाए।