कोहरे से निपटने को इस साल भी रेलवे अंग्रेजों के जमाने की जुगाड़ टेक्नालॉजी पर निर्भर रहेगा, क्योंकि चंडीगढ़ आने वाली टेनों में फॉग डिवाइस सिस्टम लगा ही नहीं। यानी ट्रेनों की सिग्नल बताने और उसे सुरक्षित गति से गुजारने के लिए पटरियों पर पटाखे फोड़ने होंगे। जिन ट्रेनों में फॉग डिवाइस सिस्टम लगे हैं, उनमें आधे से ज्यादा खराब पड़े हैं।
उत्तर भारत में धुंध का कहर शुरू हो चुका है। नतीजा टेनें अपने निर्धारित समय से दो से बाहर घंटे लेट तक लेट चल रही हैं। सूत्रों की माने तो शताब्दी जैसे एक दो ट्रेनों में भी फॉग डिवाइस सिस्टम नहीं लगे हैं। वहीं, सीनियर डीसीएम अंबाला मंडल प्रवीण गौड़ द्विवेदी को कई बार फोन किया गया और मैसेज भी भेजा गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।
स्टेशन व सिग्नल की दूरी बताने में सफल है डिवाइस
कुछ ट्रेनों में लगा फॉग डिवाइस सिस्टम सिर्फ 500 से 1000 मीटर तक की विजिबिलिटी में कामयाब है। जब विजिबिलिटी 100-200 के बीच होगी तो रेलवे को पटाखों पर ही निर्भर रहना होगा। अधिकारियों की माने तो फॉग डिवाइस सिस्टम लोको पायलट को दिया जाता है, जो पायलट को यह बताता है कि आगे कौन सा सिग्नल आने वाला है। लेकिन यह भी अधिक फॉग या शून्य दृश्यता में काम करना बंद कर देता है। ऐसे में इस डिवाइस के माध्यम से सिर्फ घटनाओं पर ही कंट्रोल किया जा सकता हैं। धुंध में ट्रेनों की रफ्तार नहीं बढ़ाई जा सकती है।
रात की शताब्दी अगले दिन अल सुबह पहुंची
धुंध के चलते चंडीगढ़ रूट की वीवीआईपी ट्रेन शताब्दी भी घंटो लेट चलने लगीं हैं। बुधवार को रात 10.45 आने वाली नई दिल्ली चंडीगढ़ शताब्दी वीरवार की अल सुबह 4.05 बजे पहुंची। यह ट्रेन अपने निर्धारित समय से चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर पौने छह घंटे देरी से पहुंची। वहीं, नई दिल्ली कालका शताब्दी सुबह 11.05 के बजाय दोपहर बाद 2.40 मिनट पर चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंची। इस ट्रेन के लेट होने से कालका जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई यात्रियों ने अपने टिकट वापस किए और बस से कालका रवाना हुए। वहीं लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस को चंडीगढ़ 10 बजे पहुंचना था यह ट्रेन वीरवार को 5.30 बजे शाम को स्टेशन पहुंची। इसी प्रकार ऊंचाहार एक्सप्रेस 5 घंटे लेट, चंडीगढ़ लखनऊ एक्सप्रेस 6 घंटे लेट, उसी तरह 15012 भी लेट, वहीं 12005 कालका शताब्दी एक्सप्रेस चार घंटे से अधिक लेट आने की सूचना मिली है।