अर्थशास्त्री डॉ. बिमल अंजुम का कहना है कि यह भविष्य का बजट है। इससे हरियाणा के लिए प्रगति के द्वार खुलेंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आवास और औद्योगिक क्षेत्र में सबसे अधिक लाभ होगा। केंद्रीय योजनाओं में बीते वित्त वर्ष की तुलना अधिक राशि आएगी। केंद्र सरकार ने एमएसपी के लिए बजट का प्रावधान किया है। ऐसे में हरियाणा सरकार और अधिक फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सकेगी। अभी प्रदेश में 11 फसलों को एमएसपी पर खरीदा जा रहा है। एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए भी केंद्र सरकार योजना लाने जा रही है। जिससे सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों के दिन बहुरेंगे।
ये मांगें नहीं हुईं पूरी
- ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नाबार्ड की तर्ज पर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से 2.75 प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज नहीं
- राखीगढ़ी के विकास लिए अलग बजट नहीं मिला
- जीएसटी के लिए हाईब्रिड मॉडल नहीं, पुरानी पद्वति जारी रहेगी
- मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना में बड़ी संख्या में लोगों को मुद्रा स्कीम के माध्यम से ऋण पर ब्याज माफी योजना नहीं बनाई
- एफपीओ के लिए कर्ज सीमा फिलहाल 2 करोड़ रुपये ही रहेगी
- एमएसएमई के निर्यात के लिए सब्सिडी का निर्धारण नहीं
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि बजट में कुछ नहीं। मध्यम वर्ग व व्यापारियों को मायूसी हाथ लगी है। केंद्रीय बजट में 5 लाख रुपये तक पूरी आयकर छूट नहीं दी गई। 25 लाख रुपये तक 20 प्रतिशत व 25 लाख रुपये से 1 करोड़ तक 25 प्रतिशत आयकर व इससे ऊपर 30 प्रतिशत टैक्स लेने की भी सरकार ने घोषणा नहीं की।
लघु-मझौले, खुदरा व्यापारियों की उम्मीदें धराशायी, किसान नाखुश
केंद्रीय बजट से लघु-मझौले और खुदरा व्यापारियों की उम्मीदें धराशायी हो गई हैं और किसान भी नाखुश हैं। राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित गुप्ता व कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि बजट चुनिंदा उद्योगपतियों के लिए राहत देने वाला और बाकी वर्गों के लिए खोदा पहाड़ निकली चुहिया जैसा है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी संग्रह में वृद्धि के बावजूद देश का राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है। यह इस बात का सुबूत है कि सरकार व्यापारियों, लघु उद्योगों व आम आदमी को सिर्फ कमाई का साधन समझने लगी है। गरीब, नौकरीपेशा, मध्यम वर्ग, किसान, युवाओं और छोटे उद्योगों के लिए बजट में कुछ नहीं है। किसानों का कहना है कि एक साल से अधिक लंबे समय तक चले आंदोलन के बावजूद आम बजट से मायूसी हाथ लगी है। बजट में न तो कर्ज मुक्ति की बात है और न ही एमएसपी गारंटी कानून की। केवल बहकाने के लिए आंकड़ों का जाल है।