लुधियाना के बैंस बंधुओं से भारतीय जनता पार्टी की सीटों को लेकर बात नहीं पाई। इस कारण से दोनों दलों के बीच 2022 के चुनावी रण को लेकर होने वाला गठबंधन सिरे नहीं चढ़ सका। गठबंधन न हो पाने की वजह बैंस बंधुओं द्वारा 15 सीटों की मांग को बताया जा रहा है। भाजपा सिर्फ पांच सीटें ही दे रही थी।
बैंस बंधुओं ने अक्तूबर 2016 में लोक इंसाफ पार्टी बनाई थी। 2017 में विधानसभा चुनाव से चार माह पहले चुनाव आयोग में आवेदन किया था। बड़े भाई बलविंदर सिंह बैंस पार्टी के चेयरमैन हैं, जबकि उनके छोटे भाई सिमरजीत सिंह बैंस प्रधान हैं। 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में बैंस बंधु भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे थे।
दोनों दलों के बीच चुनाव में गठबंधन का आधार सीट शेयरिंग को लेकर बना था। हालांकि सीटों को लेकर बात नहीं बन पाने के कारण अब गठबंधन टूट गया है। बैंस बंधुओं की ओर से भाजपा से 15 सीटें मांगी जा रही थीं लेकिन भाजपा सिर्फ पांच सीटें ही देना चाह रही थी। अंत में दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर बात नहीं बन पाई और दोनों के चुनाव में रास्ते अब अलग हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार बैंस बंधु अब अकेले ही चुनाव मैदान में उतरेंगे।
2017 में आप के साथ लड़ा था चुनाव
बैंस बंधु लुधियाना से विधायक हैं। दोनों भाइयों ने 2017 पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन किया था। हालांकि अरविंद केजरीवाल की ओर से बिक्रम सिंह मजीठिया से माफी मांगने को लेकर बैंस बंधुओं ने खुद को गठबंधन से अलग कर लिया था।
कैप्टन और भाजपा बांटेगी बैंस बंधुओं की सीटें
गठबंधन के तहत बैंस बंधुओं को दी जाने वाली पांच सीटें अब भाजपा और कैप्टन की पंजाब लोक कांग्रेस पार्टी के बीच बांटी जाएंगी। भाजपा के कुछ नेताओं ने बताया कि भाजपा को तीन और कैप्टन को दो सीटें मिलेंगी। इससे पहले 10 सीटों को लेकर कैप्टन और भाजपा के बीच भी पेच फंस गया था, हालांकि अब वह सुलझ गया है।