तब महिंदर कौर ने पैसे शाम को देने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद परमजीत शाम को महिंदर कौर के घर पैसे लेने गया तो वहां पर पहले से मौजूद पुलिस कर्मियों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। परमजीत सिंह के पहचान पत्र से उसकी पहचान हुई। पुलिस ने इसे आतंकवादियों के साथ क्रास फायरिंग के दौरान गलती से गोली लगने का मामला बताया। इसके बाद परिवार कोर्ट गया।
1993 में पुलिस द्वारा अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर नंबर 32 चमकौर साहिब थाने में दर्ज की गई थी। परमजीत सिंह के परिवार ने मई 2002 में पुलिस के खिलाफ क्रिमिनल कंप्लेंट दायर की। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने धारा 304 (ए), 120 बी गैर इरातन हत्या का चार्ज लगा दिया था। ये चार्ज आरोपी तत्कालीन एसएसचओ हरपाल सिंह (सेवानिवृत्त एसपी) समेत तत्कालीन एएसआई संतोख सिंह, गुरनाम सिंह तत्कालीन एएसआई बेला चौकी, इकबाल मुहम्मद हेड कांस्टेबल, मोहिंदर सिंह कांस्टेबल, सुखविंदर लाल कांस्टेबल, परमेल सिंह कांस्टेबल, रजिंदर सिंह कांस्टेबल, जसविंदर सिंह कांस्टेबल और मोहिंदर कौर के खिलाफ लगा था।
शिकायतकर्ता दलजीत सिंह ने मामले में हत्या की धारा 302 लगवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और हाईकोर्ट ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट को ही कार्रवाई के लिए हिदायत दी थी। इसके बाद से सभी आरोपी जमानत पर चल रहे थे। दो मार्च 2009 में अदालत ने आरोपियों पर गैर इरादतन हत्या का चार्ज लगाया। शनिवार को जिला के सिविल जज जूनियर डिवीजन हरीश कुमार ने मामले में गैर इरादतन हत्या के आरोप को हत्या के आरोप में तब्दील किया है।
एडवोकेट अर्शनूर सिंह ने बताया कि महिंदर कौर ने एक अन्य मामले में अदालत में बयान देते हुए इस मामले की सच्चाई बताई थी। महिंदर कौर के यही बयान इस मामले में भी लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि अब अदालत ने इस संबंध में सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या का आरोप तय कर दिया है और सेशन कोर्ट में अगली सुनवाई होगी।