मामले की गंभीरता को देखते हुए 5 अप्रैल 2020 को केस नंबर आरसी-19/ 2020 दर्ज किया था। एनआईए द्वारा दर्ज केस की मोहाली स्थित एनआईए की विशेष अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान पन्नू एक बार भी अदालत में पेश नहीं हुआ। जिसके बाद उसे अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया। साथ ही पन्नू के चंडीगढ़ के सेक्टर 15 स्थित कोठी के बाहर आर्डर चस्पां किए थे। जिसके बाद अदालत के निर्देशों को शनिवार दोपहर एनआईए की टीम की ओर से पन्नू की उक्त कोठी को अटैच करने की कार्रवाई की गई है।
एनआईए ने बाकायदा कोठी के बाहर बोर्ड लगाते हुए साफ कर दिया है कि इस संपत्ति पर अब गुरपतवंत सिंह पन्नू का कोई अधिकार नहीं है। यह अब सरकारी संपत्ति बन गई है। मोहाली में 2020 में दर्ज एक मामले में पन्नू भगोड़ा घोषित है। इस कोठी के एक चौथाई हिस्से को एनआईए कोर्ट के आदेश पर पहले ही अटैच कर लिया गया था।
2020 में हुई थी संपत्ति कुर्क करने की कार्यवाही
इससे पहले साल 2020 में गुरपतवंत सिंह पन्नू को भगोड़ा घोषित करते हुए उसकी संपत्तियां कुर्क की गई थीं। उस समय कुर्की होने का मतलब ये था कि वो अपनी संपत्ति को बेच नहीं सकता था, लेकिन इस बार जब्त हुई संपत्तियों पर से उसका मालिकाना हक भी हट गया, अब ये संपत्तियां सरकारी हो गई हैं।
कौन है पन्नू
मूल रूप से पंजाब के खानकोट से ताल्लुक रखने वाले गुरपतवंत सिंह पन्नू के पास वर्तमान में अमेरिका की नागरिकता है। पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई करने के बाद पन्नू विदेश चला गया था तभी से वह कनाडा और अमेरिका में रह रहा है। वह विदेश में रहकर ही खालिस्तानी गतिविधियों को अंजाम देता रहता है और समय-समय पर वीडियो जारी कर भारत सरकार के खिलाफ जहर उगलता है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से उसने सिख फॉर जस्टिस संगठन नाम के एक आतंकी संगठन का गठन भी किया है, जिस पर भारत ने 2019 में बैन लगा दिया था।