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कोरोना: दूसरी लहर ढा रही अलग कहर, सीधा फेफड़ों पर कर रही वार, इस दिक्कत को न करें नजरअंदाज 

Tue, 04 May 2021 04:45 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ 

सार

विशेषज्ञों का कहना है कि मृतकों में सांस की बीमारी या फेफड़े में संक्रमण वाले मरीजों की संख्या अन्य मरीजों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है।  
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कोरोना फेफड़ों पर कर रहा वार। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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कोरोना महामारी के कारण होने वाली मौतों की संख्या दिनोंदिन तेजी से बढ़ रही है। महज आठ दिनों में 63 मरीजों की जान चली गई है। चिंता की बात यह है कि इनमें से 50 ऐसे मरीज थे, जिन्हें सांस संबंधी परेशानी थी। विशेषज्ञों का कहना है कि मृतकों में सांस की बीमारी या फेफड़े में संक्रमण वाले मरीजों की संख्या अन्य मरीजों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में जरूरी है कि जरा भी लापरवाही न की जाए। 

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विशेषज्ञ कोरोना की दूसरी लहर को पहली लहर से बिल्कुल अलग ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि पहली लहर के मृतकों में सबसे ज्यादा संख्या अन्य गंभीर बीमारियों जैसे उच्च रक्तचाप, किडनी, कैंसर व मधुमेह से जूझ रहे मरीजों की थी, जो इस बार बिल्कुल अलग रूप में सामने आ रही है। मौजूदा समय में सांस संबंधी बीमारियों वाले मरीजों पर मौत का खतरा सबसे ज्यादा मंडरा रहा है।

केस- 1

सेक्टर- 19 निवासी 42 साल के पुरुष की 1 मई को जीएमएसएच-16 में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह कोरोना पॉजिटिव होने के साथ ही सांस की गंभीर बीमारी व फेफड़े में संक्रमण की चपेट में था।

केस- 2
मौलीजागरां के एक साल के बच्चे की जीएमएसएच-16 में 30 अप्रैल को मौत हो गई। वह कोरोना पॉजिटिव होने के साथ ही सांस की गंभीर बीमारी से भी ग्रस्त था।

केस- 3
सेक्टर- 52 निवासी 22 साल की युवती की जीएमएसएच- 16 में इलाज के दौरान 28 अप्रैल को मौत हो गई। वह कोरोना पॉजिटिव होने के साथ ही फेफड़े के गंभीर संक्रमण से ग्रस्त थी।

युवाओं में बढ़ता फेफड़े में संक्रमण खतरनाक
पीजीआई में भर्ती कोरोना के 345 मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या 13 से 39 साल के बीच के लोगों की है। भर्ती मरीजों में एक साल के 15 बच्चे, 1 से 12 साल के बीच के 5 बच्चे, 13 से 39 साल के बीच के 117 मरीज, 40 से 59 साल के बीच के 99 मरीज, 60 से 79 साल के बीच के 61 मरीज व 80 साल से ज्यादा उम्र के 2 मरीज का इलाज चल रहा है। 

प्रोफेसर जीडी पुरी का कहना है कि चिंता की बात यह है कि अब भी पीजीआई में भर्ती किए गए कुल मरीजों में भी 13 से 38 साल के बीच के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके साथ ही इस वर्ग के मरीजों में सांस संबंधी संक्रमण और परेशानी की शिकायत तेजी से बढ़ रही है जो काफी हद तक मौत का कारण भी बन रही है। ऐसे में बचाव और एहतियात बेहद जरूरी हो गया है।
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ये घरेलू नुस्खे अपनाएं

  • दिन में तीन से चार बार गरम पानी से भाप लें। पानी में अगर अजवाइन और कपूर डाले तो और बेहतर होगा।
  • हल्के गुनगुने पानी में नींबू डालकर पानी पीते रहें। गर्म पानी का सेवन भी फेफड़े को संक्रमण से बचाता है।
  • ठंडे पानी का सेवन न करें। नारियल का पानी पीते रहें। इसके अलावा संतरा और सेब लें, फायदा मिलेगा। 
फेफड़ों को मजबूत बनाने के उपाय 
  • सुबह उठकर अनुलोम-विलोम करें
  • गुब्बारों को फुलाएं
  • 20 सेकंड से 60 सेकंड तक श्वास को रोकें। ऐसा तीन बार करें
मृतकों में सांस के मरीज ज्यादा
दिन                 कुल मौतें                सांस की परेशानी बनी मौत का कारण


25 अप्रैल              2                                        2
26 अप्रैल              5                                        5
27 अप्रैल               6                                       6
28 अप्रैल               11                                     8
29 अप्रैल                 8                                     4
30 अप्रैल               13                                    10
1 मई                   11                                      7
2 मई                     7                                     6

यह बहुत गंभीर स्थिति है। शुरुआती दौर में मृतकों में किडनी, कैंसर, मधुमेह व उच्च रक्तचाप से ग्रस्त मरीजों की संख्या ज्यादा होती थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। फेफड़े में संक्रमण और सांस संबंधी परेशानियों वाले मरीजों की जान अन्य मरीजों की तुलना में ज्यादा जोखिम में है। इसलिए सांस संबंधित परेशानी होने पर जरा भी नजरअंदाज न करें।  -प्रो. जीडी पुरी, पीजीआई में कोविड प्रबंधन के चेयरमैन

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