पार्किंग घोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार
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चंडीगढ़ में पार्किंग का ठेका लेने के लिए फर्जी बैंक गारंटी देने के मामले में गिरफ्तार अनिल शर्मा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सूत्रों के अनुसार शर्मा ने न सिर्फ नगर निगम को फर्जी बैंक गारंटी दी थी, बल्कि पार्किंग की पर्ची काटने में भी उस पर गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं। आरोपों के अनुसार ऐसा करने उसने लाखों-करोड़ों के टैक्स की चोरी की है।
अनिल शर्मा फिलहाल पुलिस रिमांड में है और आर्थिक अपराध शाखा उससे पार्किंग घोटाले को लेकर पूछताछ कर रही है। शर्मा ने वर्ष 2020 में नगर निगम से 57 पार्किंगों का ठेका पाश्चात्य एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी से लिया था। जबकि उसने पाश्चात्य नाम से ही एक और कंपनी बना रखी थी। इसका नाम उसने पाश्चात्य एंटरटेनमेंट पार्किंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड रखा था। सूत्रों के अनुसार टेंडर लेने के बाद कुछ पार्किंग की पर्चियां पाश्चात्य एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड तो कुछ पाश्चात्य एंटरटेनमेंट पार्किंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड यानि दूसरी कंपनी के नाम से भी काटी जाती थी। हालांकि पार्किंग की जो स्लिप लोगों को दी जाती थी, उस पर सिर्फ पाश्चात्य एंटरटेनमेंट लिखा होता था।
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आरोप है कि इस तरह से ही शर्मा ने नगर निगम को दिखाया कि वो काफी घाटे में है और उसका बहुत नुकसान हो रहा है। टेंडर की शर्तों के अनुसार हर महीने कंपनी को 45 लाख रुपये निगम को देना था। उसने करीब डेढ़ साल तक ये रुपये जमा भी कराए, लेकिन उसके बाद से वह खुद को घाटे में दिखाता रहा और नगर निगम को फीस माफी के लिए पत्र लिखता रहा। ऐसा करके आरोपी ने लाखों-करोड़ों के टैक्स की चोरी की है। इस मामले में भी उसके खिलाफ जल्द जांच शुरू हो सकती है।
अनिल शर्मा का भाजपा से नाता, कांग्रेस-आप ने खोला मोर्चा
पार्किंग घोटाले में पकड़े गए अनिल शर्मा का भाजपा से नाता होने का खुलासा होने के बाद शहर की राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल है। भाजपा नेताओं ने इस पर मौन धारण कर लिया है तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस और आप के नेताओं ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग कर दी है।
आप पार्षद और निगम में नेता प्रतिपक्ष दमनप्रीत सिंह बादल ने कहा है कि पार्टी सड़क से सदन तक जोर शोर से इस मुद्दे को लेकर जाएगी और आने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा की करनी को जन-जन तक पहुचाएगी। कहा कि घोटाले में भाजपा नेता का हाथ था, तभी इस मामले को टाला जा रहा था। कांग्रेस के नेता सतीश कैंथ ने कहा कि उन्होंने पहले ही आशंका जताई थी कि इस घोटाले में भाजपा नेताओं का हाथ हो सकता है। इसलिए इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए।
विभागीय जांच कब होगी पूरी?
पाश्चात्य कंपनी की बैक गारंटी फर्जी है, ये नगर निगम को 18 फरवरी को ही पता चल गया था। इसके बाद नगर निगम ने चंडीगढ़ के एसएसपी को पत्र लिखकर कंपनी के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की थी। पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के पास यह केस 6 मार्च को पहुंचा, जिसमें अब तक कुल चार लोगों को गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन अब तक नगर निगम की विभागीय जांच पूरी नहीं हुई है।
12 मार्च को प्रेस कांफ्रेंस कर नगर निगम की आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने कहा था कि 10 दिन में रिपोर्ट आ जाएगी, लेकिन अब तक रिपोर्ट का अता-पता नहीं है। कांग्रेस व आप के नेता आरोप लगा रहे हैं कि इस घोटाले में शामिल अफसरों को बचाने की कोशिश की जा रही है। बता दें कि लाइसेंस फीस, जुर्माना और दोनों का ब्याज मिलाकर पाश्चात्य कंपनी पर नगर निगम का करीब सात करोड़ रुपये का बकाया है।