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मास्टर प्लान 2031: न्यू चंडीगढ़ में कोई हॉस्पिटल नहीं

Mon, 04 May 2015 12:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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शहर के अस्पतालों पर जिस कदर मरीजों का बोझ बढ़ रहा है, उस हिसाब से कम से कम सात हॉस्पिटल और 55 डिस्पेंसरी की जरूरत है। मौजूदा समय में शहर में सिर्फ छह हास्पिटल और 40 डिस्पेंसरियां हैं। इसके बाजवूद मास्टर प्लान में किसी नए हॉस्पिटल का प्रावधान नहीं किया गया।
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हालांकि, अस्पतालों व डिस्पेंसरियों के एक्सटेंशन का प्रावधान जरूर किया गया है। इनमें जीएमसीएच-32 व पीजीआई दोनों का एक्सटेंशन होना है। इसके अलावा कम्युनिटी हेल्थ सेंटर की भी क्षमता बढ़ाने की बात कही गई है। इसके अलावा इस बात का भी जिक्र है कि शहर का सातवां हास्पिटल साउथ सेक्टर में बनना चाहिए।

साउथ सेक्टरों में नहीं है हॉस्पिटल
मास्टर प्लान में जीएमसीएच-32 के एक्सटेंशन का प्रपोजल है। इसके तहत हॉस्पिटल को 10 एकड़ की जमीन मुहैया करवाई जाएगी। इसमें 300 बेड का हॉस्पिटल बनाया जाएगा। हॉस्पिटल के लिए यह जमीन साउथ सेक्टर की ओर बनाने की योजना है, क्योंकि साउथ सेक्टरों में एक भी हास्पिटल नहीं है। यदि इस सेक्टर में हॉस्पिटल बन जाए तो लोगों की काफी दिक्कतें दूर हो सकती हैं।
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भविष्य की अनदेखी
•शहर को सात हास्पिटल और 55 डिस्पेंसरियों की है जरूरत
•अभी सिर्फ छह हॉस्पिटल और 40 डिस्पेंसरियां हैं
•साउथ सेक्टरों में सातवां हॉस्पिटल बनाने का है जिक्र

मास्टर प्लान के प्रपोजल
•सेक्टर 22 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में 100 बेड बढ़ाकर उसे मेटर्नल एंड चाइल्ड हेल्थ सर्विसेस के रूप में विकसित करना।
•सेक्टर-45 में 50 बेड का पालीक्लीनिक का निर्माण।
•गांव बहलाना, रायपुर खुर्द व किशनगढ़ में हेल्थ सेंटर का निर्माण।
•कैंबवाला में रूरल हेल्थ केयर सर्विसेज का अपग्रेडेशन व मौलीजागरां की सिविल डिस्पेंसरी को प्राइमरी हेल्थ सेंटर में तब्दील करना।
•सेक्टर-52, सेक्टर-38 वेस्ट, सेक्टर-48 व सेक्टर-63 में नई डिस्पेंसरी का निर्माण।
•सेक्टर-41, सेक्टर-52, सेक्टर-30 में होम्योपैथिक डिस्पेंसरी का निर्माण।
•जीएमसीएच-32 में ब्लाक ई, जे और एफ का निर्माण।
•पीजीआई के नेहरू हास्पिटल का रेनोवेशन कराना।

पीजीआई, जीएमसीएच में बढ़ रहा बोझ
पीजीआई, जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 में मरीजों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। जब मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा था, उस दौरान पीजीआई की ओपीडी में सालाना मरीजों की संख्या 17 लाख बताई गई थी, जबकि साल 2014 में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या 21 लाख पहुंच गई है। इसी तरह से जीएमसीएच 32 व जीएमएसएच-16 में भी मरीजों का बोझ बढ़ा है। जीएमसीएच-32 में ओपीडी में मरीजों की संख्या करीब एक लाख तक पहुंच गई है।
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