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प्राथमिक और उच्च शिक्षा संस्थाओं में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाएगी एनईपीः प्रो. राजकुमार

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चंडीगढ़। नई शिक्षा नीति भारतीय प्राथमिक और उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान लाएगी। यह भारत में शिक्षा प्रणाली के नए युग की शुरुआत करेगी और भारत तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालयों आदि के काल में विद्यमान शिक्षा प्रणाली की खोई हुई महिमा को पुन: प्राप्त करेगा। यह बात वीरवार को वीसी प्रो. राजकुमार ने पीयू के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पर आयोजित वेबिनार में कही।
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वेबिनार को शुभारंभ वीसी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 को प्रकृति में समग्र और भविष्यवादी नीति बताया। उन्होंने कहा, ‘जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लोग भारत में अध्ययन करने आते हैं, तो उन्हें इसी नीति का लाभ मिलेगा। यह आत्मनिर्भर भारत के मिशन को पूरा करने की दिशा में पूरा कार्य करेगी।’ एनईपी में सभी 22 भाषाओं को शामिल करना और राष्ट्रीय भाषा में शिक्षण/सीखना आदि बड़ा कदम है। इससे प्रत्येक बच्चे को अपनी मातृभाषा में सिखाई गई चीज को आसानी से समझने में मदद मिलेगी। डॉ. सुनील गुप्ता, एचपी स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के अध्यक्ष एवं पूर्व वीसी एचपीयू शिमला ने बताया कि कैसे नीति भारत की संपूर्ण शिक्षा प्रणाली को बदल देगी। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. संदीप मल्होत्रा ने एनईपी के शोध पहलुओं और इस नीति से भारतीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों की अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ाया जाएगा। पीयू के पूर्व वीसी प्रोफेसर आरसी सोबती ने बताया कि एनईपी-2020 एक मूल्य आधारित शिक्षा नीति है और यह छात्रों के बीच मानवतावादी, नैतिक, कौशल उन्मुख और अन्य मूल्यों को विकसित करती है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष डॉ. कश्मीर सिंह ने सभी का आभार जताया।
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