हरियाणा में सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के मुकाबले निजी अस्पतालों के डॉक्टरों पर लापरवाही के मामले 17 प्रतिशत अधिक हैं। पिछले सात साल में निजी अस्पतालों के डॉक्टरों खिलाफ 68 और सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ मात्र चार मामले सामने आए हैं। खास बात ये है कि आठ जिलों में सरकारी और निजी किसी के खिलाफ भी कोई मामला नहीं आया है।
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने यह जानकारी गुरुवार को फरीदाबाद के विधायक नीरज शर्मा के सवाल के जवाब में विधानसभा सदन के पटल पर रखी। आंकड़ों के मुताबिक, निजी अस्पतालों के डॉक्टरों के खिलाफ सबसे अधिक मामले गुरुग्राम में 45 आए। इनके अलावा, मेवात में 7, सोनीपत 5 भिवानी में 3, रेवाड़ी 2, फरीदाबाद, जींद, कैथल, नारनौल, पंचकूला, पानीपत में 1-1 लापरवाही का केस आया।
वहीं, सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ केवल सोनीपत जिले में ही चार मामले सात साल में आए हैं। शेष किसी भी जिले में सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ केस नहीं आया। वहीं, अंबाला, चरखी दादरी, हिसार, झज्जर, करनाल, कुरुक्षेत्र, रोहतक, सिरसा और यमुनानगर जिलों में सरकारी और निजी दोनों में से किसी के खिलाफ कोई मामला नहीं आया।
1.80 लाख आय और पांच एकड़ से कम भूमि वालों को किया जा रहा आयुष्मान योजना में शामिल
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि राज्य में आयुष्मान भारत योजना के तहत बीपीएल परिवारों सहित अन्य गरीब परिवारों को शामिल करने के संबंध में अन्य श्रेणियों, जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम या उसके बराबर है और पांच एकड़ से कम की भूमि है, को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सत्र के दौरान एक सवाल के जवाब में विज ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना में हरियाणा के 15.5 लाख लाभार्थी परिवारों (एसईसीसी द्वारा चिह्नित) को सम्मलित किया है। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या पर रोक नहीं है।
यह योजना पात्रता के आधार पर है। परिभाषित सामाजिक आर्थिक जनगणना 2011 के डेटाबेस में चिह्नित प्रत्येक परिवार योजना के तहत लाभ का दावा करने का हकदार होगा। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत हरियाणा स्वास्थ्य सुरक्षा प्राधिकरण एक सोसाइटी ट्रस्ट के रूप में इस योजना को लागू करने के लिए पंजीकृत की गई है। राज्य शिकायत निवारण समिति एवं संबन्धित जिलों के उपायुक्तों की अध्यक्षता में सभी जिलों में राज्य शिकायत निवारण समिति स्थापित की गई है।