भारत द्वारा 2008 में पाकिस्तान सरकार को सौंपी गई 20 मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की सूची में शामिल खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के सरगना रंजीत सिंह नीटा पंजाब में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने का षड्यंत्र रचने लगा है। कभी पाकिस्तान और कभी जर्मनी से आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देकर पंजाब को दहलाने के साजिश रच रहा नीटा पिछले कुछ साल से पाकिस्तान में शरण लिए हुए है।
मूल रूप से जम्मू निवासी नीटा जम्मू के सांबा और आरएसपुरा में छोटे-छोटे अपराध करता था। इसी दौरान उसका संपर्क पाकिस्तान के तस्करों के साथ हुआ। पाकिस्तानी तस्करों ने ही नीटा और आईएसआई के साथ मेलजोल करवाने में भूमिका निभाई।
नीटा जम्मू कश्मीर की सीमा से कई बार पाकिस्तान गया। वहां उसने आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की ट्रेनिंग ली। आईएसआई ने नीटा को बम ब्लास्ट करने के साथ-साथ भीड़-भाड़ इलाकों में हैंड ग्रेनेड फेंकने का प्रशिक्षण दिया था।
नीटा ने 1988 में श्री हरमंदिर साहिब में हुए ऑपरेशन ब्लैक थंडर के बाद आईएसआई के इशारों पर पंजाब में आतंकी घटनाओं को अंजाम देना शुरू किया था पंजाब में आतंकवाद के काले दौर के दौरान इस आतंकी संगठन में शामिल गुर्गों ने कई निर्दोषों की हत्या की। पंजाब व जम्मू कश्मीर में कई जगह बम ब्लास्ट करने वाले नीटा पर कठुआ के एक पुलिस अधिकारी की हत्या का मामला भी दर्ज है।
2005 में यूरोप यूनियन द्वारा खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स को आतंकवादी संगठन घोषित करने के बाद बौखलाए नीटा ने पाकिस्तान में शरण लिए हुए खालिस्तान कमांडो फोर्स के सरगना परमजीत सिंह पंजवड़ के साथ मिल कर पहले भी तरनतारन में आतंकी भर्ती के प्रयास किए हैं। चूंकि पंजवड़ तरनतारन जिले से है, इसलिए उसके संबंध अब भी उन परिवारों के साथ बताए जाते है जिनके परिवार का कोई सदस्य आतंकवादी संगठनों के साथ जुड़ा हुआ था।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए चारों आतंकवादियों के बाद पुलिस सतर्क हो गई। पूर्व में रहे आतंकवादियों व उनके परिवारों के संबंध कहीं नीटा के साथ तो नहीं जुड़ रहे, पुलिस अब इन बिंदू पर भी जांच में जुट गई है।
आरोपी बलबीर और बलवंत उड़मुड़ के निहंगों के डेरे में करते थे सेवा
पंजाब पुलिस ने खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स को पुनर्जीवित करने की साजिश के चलते खड़े किए जा रहे जिस आतंकवादी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, उसके तार टांडा और टांडा के गांव मियानी से जुड़े हैं। यह खुलासा काउंटर इंटेलिजेंस और पंजाब पुलिस के सांझे ऑपरेशन के बाद हुआ।
जानकारी के अनुसार इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने पहले आकाशदीप सिंह रंधावा को काबू किया और बाद में उसकी निशानदेही से ही टांडा के गांव मियानी में बिजली घर तल्ला रोड पर रहने वाले आरोपी हरभजन सिंह पुत्र करतार सिंह के घर से 21 सितंबर की देर शाम बलवंत सिंह उर्फ बाबा निहंग और बलवीर सिंह को काबू किया। बताया जा रहा है कि बलबीर सिंह और बलवंत सिंह उड़मुड़ में निहंगों के एक डेरे में सेवा करते थे और वहीं रहते थे।
मियानी से संबंधित हरभजन सिंह भी उक्त डेरे में सेवा करने जाता था। तरनतारन से संबंधित हरभजन सिंह पिछले 10 साल से मियानी में परिवार समेत रह रहा है। बताया जा रहा है कि पुलिस हरभजन सिंह के भाई दयाल सिंह को भी पूछताछ के लिए साथ ले गई है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। हरभजन की पत्नी कुलदीप कौर का कहना था कि उसका पति निर्दोष है, वह तो डेरे पर सेवा करने जाता था जहां उक्त लोग उसे मिले थे। किसी भी किस्म के अपराध या आतंकवाद से उसका कोई लेना देना नहीं है।
साधारण किसान परिवार से है आतंकी निहंग बाबा बलवंत सिंह
चोहला साहिब से पकड़े गए चार आतंकवादियों में शामिल बाबा बलवंत सिंह उर्फ निहंग तरनतारन के गांव मोहनपुर वडिंग का रहने वाला है। वह एक साधारण किसान परिवार से है। बाबा बलवंत सिंह की पत्नी की 20 वर्ष पहले मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से उसने घर छोड़ दिया और उसकी डेढ़ वर्ष की बेटी को उसकी भाभी पाल रही है।
घर में मौजूद बाबा बलवंत सिंह की भाभी कर्मजीत कौर, ताया आत्मा सिंह ने बताया कि बाबा बलवंत सिंह उनके पास कुछ समय पहले मिलने के लिए आता था। कुछ दिन पहले खड़ूर साहिब के मेले पर कुछ समय के लिए वह घर आया था और उसके बाद वह परिजनों से मिलकर चला गया।
बाबा बलवंत सिंह के परिजनों ने बताया कि बाबा ज्यादातर डेरे में रहता है। उन्हें नहीं पता कि बाबा क्या काम करता है और पुलिस ने उसे कहां से गिरफ्तार किया। उन्हें खुद समाचारों से पता चला है कि बाबा बलवंत सिंह को पुलिस ने हथियारों के साथ गिरफ्तार कर लिया है।