उत्तरप्रदेश के लखनऊ की एक महिला डॉक्टर को साल 2017 का नीरजा भनोट अवार्ड प्रदान किया गया। ये महिला एक बहुत ही नेक काम कर रही हैं। हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने लखनऊ की डॉ. सरोजिनी अग्रवाल को प्रतिष्ठित नीरजा भनोट अवार्ड से सम्मानित किया। यह अवार्ड वीरवार को सेक्टर 31 स्थित स्थित पीएचडी चेंबर में आयोजित एक समारोह में दिया गया। इस अवार्ड में डेढ़ लाख रुपये नकद, एक प्रशस्ति पत्र और ट्राफी दी जाती है ।
यह पुरस्कार उस भारतीय निडर महिला को दिया जाता है, जिसने सामाजिक अन्याय का डटकर मुकाबला कर पीड़ितों की मदद की हो। वीपी प्रभाकर, कुसुम गुप्ता और कर्नल परविंदर सिंह की ज्यूरी ने सर्वसम्मति से डॉ. सरोजिनी अग्रवाल यह अवार्ड को देने का निर्णय लिया। राज्यपाल की ओर से डॉ. सरोजनी के किए गए कार्यों केलिए पांच लाख की ग्रांट देने की घोषणा की। पुरस्कार लेने के बाद डॉ. अग्रवाल ने कहा कि वह यह अवार्ड लेकर काफी खुश है।
डॉ. सरोजिनी अग्रवाल मनीषा मंदिर की मां कही जाती है । वर्ष 1978 में डा सरोजिनी ने अपनी आठ वर्षीया बेटी मनीषा को एक कार दुर्घटना में खो दिया था। इस सदमे के बाद उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि वह भविष्य में उन पीड़ित बेसहारा लड़कियों का सहारा बनेगी जो दयनीय और दिशाहीन जीवन जी रही है । उन्होंने मनीषा की याद में मंदिर स्थापित किया जहां लाचार लड़कियों को आश्रय दिया जाता है ।
वर्तमान में इस मंदिर में 700 लड़कियों को डॉ सरोजिनी द्वारा न केवल घर, कपडे़ और खाना मुहैया करवाया जाता है बल्कि अपार प्रेम, मातृत्व प्रेम और सम्मान दिया जाता है। गौरतलब है कि नीरजा भनोट ने विमान हाइजैक के दौरान अपनी जान गवां कर कई लोगों की जाने बचाई थी। सितंबर 1986 में कंराची एयरपोर्ट में घटित इस हादसे में नीरजा ने पैन एम प्लेन में आतंकवादियों का डटकर मुकाबला किया और पूरे विश्व के लिए मिसाल बन गई।