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कान फिल्म फेस्टिवल में धूम मचाएगी नवतेज की ‘नूरां’

Fri, 09 May 2014 01:23 PM IST
सुमित सिंह श्यौराण/अमर उजाला, चंडीगढ़
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14 मई से फ्रांस में होने वाले प्रतिष्ठित 67वें फिल्म फेस्टिवल के लिए पंजाबी लघु फिल्म नूरां को चुना गया है। पंजाबी संगीत और फिल्मों के जाने माने प्रमोटर और निर्देशक नवतेज संधू की पहली ही फिल्म फेस्टिवल में धाक जमाएगी।
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फ्रांस रवाना होने से पहले अमर उजाला से बातचीत में संधू ने बताया कि कान फिल्म फेस्टिवल में दुनिया भर से नामिनेटिड 115 फिल्मों में नूरां एकमात्र पंजाबी फिल्म है। 1993 में पंजाबी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कदम रखने वाले नवतेज ने ही सबसे पहले पंजाबी फिल्म फेस्टिवल समारोह के कांसेप्ट को शुरू किया था।

अक्तूबर 2014 में नवतेज 7वें पंजाबी फिल्म फेस्टिवल को आयोजित करेंगे। उन्होंने बताया कि नूरां फिल्म को उन्होंने आर्ट फिल्म के तौर पर तैयार किया है। 5 दिन में तैयार हुई इस फिल्म में पंजाबी साहित्य और लिट्रेचर का बेहतरीन संगम दिखाया गया है।
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फिल्म का मकसद पैसा कमाना नहीं : नवतेज

कभी भी पंजाबी फिल्मों को कमर्शियल तौर बनाने की नहीं सोची। नूरां को बनाने पर करीब 6 लाख खर्च हुए। लेकिन देश से लेकर विदेशों में भी स्क्रीनिंग पर दर्शकों से कोई पैसा नहीं लिया गया। 2013 में बनी नूरां को मुंबई से लेकर कनाडा पंजाबी फिल्म फेस्टिवल और इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ साउथ एशिया में भी खूब वाहवाही मिल चुकी है।

कनाडा, आस्ट्रेलिया और हांगकांग तक पंजाबी फिल्म ने जबर्दस्त वाहवाही लूटी। फिल्म की 5 हजार से अधिक डीवीडी निशुल्क बांटी गई है। लोगों की डिमांड पर 2 हजार का ऑर्डर दिया जा चुका है।

नवतेज ने बताया कि जून में उनकी नई पंजाबी लघु फिल्म जाने माने पंजाबी लेखक जसवंत सिंह केवल की लिखी स्टोरी पर आधारित कंब दी डयोड़ी.. अगले महीने रिलीज होगी। संधू ने कहा कि पंजाबी लिट्रेचर को पर्दे पर इसी तरह पेश करते रहेंगे।

फिल्म में सरदार सोही,कुल सिदू, जसवंत जस्सी, गुरिंदर मखना, गुरबिंदर भट्टी ने अभिनय किया है। फिल्म में गीत और संगीत अंजू चतुर्वेदी और मीनू शर्मा चतुर्वेदी ने दिया है।

एक औरत के संघर्ष और जज्बात की कहानी

फिल्म की स्क्रिप्ट रंगमंच की जानी मानी हस्ती बलवंत गार्गी की कहानी रब्बो मरासन से प्रेरित है। 31 मिनट की फिल्म को निर्देशक ने शानदार तरीके से एक सूत्र में बांधने की कोशिश की है। कहानी एक मरासन लड़की से जुड़ी है।

नवतेज के अनुसार मरासन को शादी के लिए एक व्यक्ति खरीद लेता है, लेकिन उसकी जिंदगी का बुरा दौर यहीं खत्म नहीं होता। उसे एक रिटायर्ड फौजी जबर्दस्ती पाने की कोशिश करता है, लेकिन मरासन को आखिर में एक नौकर से सच्चा प्यार मिलता है और वह उसी के साथ चली जाती है।

फिल्म में एक गाना बैकग्राउंड में रखा गया है। उन्होंने बताया कि फिल्म की प्रमोशन के लिए सिर्फ सोशल नेटवर्किंग को माध्यम चुना। उन्होंने बताया कि फिल्म की डीवीडी मुफ्त में देश और विदेश में बांटी है। पंजाब और कनाडा में फिल्म को बंपर रिस्पांस मिला है।
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पंजाबी सिनेमा का नहीं है गोल्डन पीरियड

नवतेज मौजूदा समय को पंजाबी फिल्मों का गोल्डन पीरियड बिल्कुल भी नहीं मानते। एक उदाहरण देते हुए बताते हैं कि 2013 में 44 में से 40 पंजाबी फिल्में फ्लॉप हुई। जबकि 2014 में अब तक 15 में से सिर्फ 2 फिल्में ही कुछ कर सकी।

सिर्फ कॉमेडी के दम पर पंजाबी फिल्मों को हिट नहीं कराया जा सकता। पंजाबी फिल्म निर्देशकों के पास अच्छी स्क्रिप्ट की कमी है। पंजाबी साहित्य से स्क्रिप्ट लें तो आने वाले 50 सालों तक फिल्मों के लिए दमदार स्क्रिप्ट की कमी नहीं होगी।

हिंदी और पंजाबी में बड़े बजट की फिल्मों के ऑफर मिलने पर संधू कहते हैं कि वह सिर्फ अच्छी स्क्रिप्ट और अपनी शर्तों पर ही काम करते हैं।
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