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खौफनाक रास्तों से ही होंगे श्री बदरीनाथ के दर्शन

Thu, 08 May 2014 09:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर
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आस्था के आगे बड़ी से बड़ी आपदा का मंजर भी फीका पड़ जाता है। कुछ इसी बात को यमुनानगर और जगाधरी से श्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा कर लौटे जत्थे ने प्रमाणित किया है।
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जत्थे में शामिल लोग न केवल श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की पावन प्रक्रिया के साक्षी बने, बल्कि उन्होंने यात्रा के दौरान पल-पल की गतिविधि को अपने कैमरों और डायरी में लिखकर संजोकर रखा। यात्रा से लौटने पर जत्थे में शामिल कुछ लोगों ने यात्रा में अनुभव को अमर उजाला के साथ साझा किया।

जगाधरी के अनिल गुप्ता ने बताया कि इस बार श्री बद्रीनाथ धाम पर कपाट खुलने की प्रक्रिया के दौरान बहुत कम श्रद्धालु मौजूद थे, जबकि गत वर्षों में इस पावन प्रक्रिया को देखने के लिए देश के कोने-कोने से करीब कम से कम दस हजार श्रद्धालु पहुंचते थे। उन्होंने बताया कि श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले जाने के दौरान जगाधरी और यमुनानगर से लगभग 150 श्रद्धालु वहां उपस्थित थे, जो किसी एक जिले से आने वाले लोगों की सबसे अधिक संख्या थी।
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कामचलाऊ रास्ते, लेकिन सुरक्षा दिखी चौकस

जत्थे में शामिल दर्शन लाल ने यात्रा से लौटने पर बताया कि पांडुकेश्वर से श्रीबदरीनाथ धाम तक के मार्ग में बहुत-सी सड़कें कामचलाऊ थीं, लेकिन इस बार आपदा से निपटने के लिए प्रशासन और सुरक्षा कर्मी पूरी तरह से चुस्त दिखाई दिए। सभी काम पूरे नियम-कानून और मुस्तैदी से चल रहे थे।

दोनों ओर से आमने-सामने का ट्रैफिक अधिक न हो, इसके लिए आवागमन गेट निश्चित समय अंतराल पर खोले जा रहे थे। स्थानीय दुकानदारों और निवासियाें में आपदा का वो मंजर भूलकर श्रद्धा का भाव झलक रहा था। यात्रा के दौरान कई जगहों पर दिल्ली और शामली के अखंड भंडारे व लंगर चल रहे थे।

भूस्खलन होने से आई आपदा की याद

जत्थे में शामिल लोगों ने बताया कि जब वे श्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा कर वापस लौट रहे थे तो रविवार की देर शाम बारिश होने से दो जगहों पर भूस्खलन हुआ।

इसे देखकर सालभर पहले आई आपदा की याद ने जत्थे में शामिल लोगों को झकझोर कर रख दिया। भूस्खलन होते ही हाईवे पर वाहनों के आवागमन में दिक्कतें आ गई और करीब दो घंटे यातायात थम गया, लेकिन मौके पर तैनात कर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए मार्ग पर फिर से यातायात को सुचारु कर दिया। दीपक मित्तल और गोल्डी ने भी अनुभव साझा करते हुए कहा कि मार्ग अभी भी पहले जैसा नहीं है बरसात के दौरान भूस्खलन का खतरा और बढ़ सकता है।
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पहली बार यात्रा कर मिला स्वर्ग जैसा आनंद

श्री बद्रीनाथ धाम की पहली बार यात्रा कर लौटे वीरेंद्र बजाज ने बताया कि उनके लिए यह तीर्थयात्रा जीवन की सबसे अद्भुत अनुभव था। यात्रा के दौरान उन्हें ऐसा लगा कि वे किसी स्वर्ग पर हैं।

वहीं, श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के मनोरम दृश्य के साक्षी बनने के बाद उन्हें काफी सुखद अनुभव महसूस किया। भगवान श्री बद्रीनाथ के भव्य दर्शनों और मंदिर के मुख्य पुजारी नए रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल से प्रसाद ग्रहण कर व जगाधरी यमुनानगर क्षेत्र के पुजारी पंडित काशी प्रसाद के मुखार्विंद से श्री बद्रीनाथ धाम कथा सुनकर सभी श्रद्धालु पूरी यात्रा के दौरान प्रसन्न थे।
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