नवजोत सिंह सिद्धू। (फाइल फोटो)
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पंजाब के बिजली संकट के मुद्दे पर पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को फिर ट्वीट कर अपनी ही पार्टी की सरकार को निशाने पर लिया। सिद्धू ने ट्वीट के जरिये कैप्टन सरकार से पूर्व बादल सरकार में किए गए बिजली खरीद समझौतों को रद्द करने की मांग की। सिद्धू ने पंजाब सरकार के मंत्रियों को शोपीस और विभागों पर अफसरशाही का कब्जा होने की बात कही।
नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार सुबह ट्वीट किया कि मुफ्त बिजली के खोखले वादे तब तक कोई अर्थ नहीं रखते हैं, जब तक पावर परचेज समझौतों (पीपीए) को पंजाब विधानसभा रद्द नहीं करती। आगे लिखा कि 300 यूनिट मुफ्त बिजली देना महज कल्पना है, जब तक खरीद समझौतों में नुक्स वाली धाराओं ने पंजाब को बांधा हुआ है।
सिद्धू ने लिखा कि समझौते पंजाब को 100 फीसदी उत्पादन के लिए निर्धारित चार्ज अदा करने के लिए पाबंद करते हैं, जबकि दूसरे राज्य 80 फीसदी से ज्यादा का भुगतान नहीं करते। अगर यह निर्धारित चार्ज पीपीए के अधीन निजी बिजली प्लांटों को अदा नहीं किए जाते तो यह तुरंत बिजली की लागत में 1.20 रुपये प्रति यूनिट घटा देगा।
आगे लिखा कि धान सीजन के दौरान पंजाब में बिजली की मांग 13000 या 14000 मेगावाट केवल चार माह के लिए है, जबकि आम दिनों में बिजली की मांग 5000-6000 मेगावाट है। लेकिन पीपीए के निर्धारित खर्च का भुगतान करना पड़ रहा है। साथ ही लिखा कि और भी चिंताजनक है कि पीपीए के तहत पीक सीजन के दौरान इन प्राइवेट पावर प्लांटों से बिजली की सुनिश्चित आपूर्ति का कोई प्रबंध नहीं है। जिससे धान की बुवाई के मौजूदा सीजन में निजी थर्मल प्लांट के दो यूनिट बिना मरम्मत बंद कर दिए गए। जिससे पंजाब को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ी।