चंडीगढ़ के मकान मालिकों को आर्थिक संकट ने घेर लिया है। बड़ी संख्या में यूपी-बिहार व अन्य प्रांतों से आकर चंडीगढ़ के विभिन्न गांवों में किराए के मकान में रहने वाले इन लोगों के वापस अपने गांव चले जाने के बाद बड़ी संख्या में कमरे खाली हो चुके हैं। मकानों के किराए से होनी वाली आय बहुत कम हो गई है।
मकानों का रखरखाव, बिजली-पानी और संपत्ति कर चुकाना मुश्किल हो रहा है। गांव के मकान मालिकों को अधिक परेशानी हो रही है। गांव के लोगों का कहना है कि करीब 50 प्रतिशत कमरे ही किराए पर चढ़ रहे हैं। कई लोगों की बैंकों की किस्तें भी टूट गई हैं। लोगों ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि गांवों के लोगों का बिजली-पानी का बिल माफ हो।
साथ ही इन पर लगा जुर्माना भी माफ हो, क्योंकि उनके घर का खर्च किराए से ही चलता है और अब किराया नहीं मिलने से उन्हें परेशानी होने लगी है। मकान मालिकों का कहना है कि पिछले वर्ष कोरोना लॉकडाउन के कारण भी बहुत से मजदूर अपने घरों को चले गए थे और वह किराया भी नहीं देकर गए थे। उस समय भी बिजली-पानी का बिल मकान मालिकों को ही भरना पड़ा था।
पीएम व प्रशासक के कहने पर किराया माफ किया, अब सुध ले प्रशासन
गांव दड़वा के पूर्व सरपंच गुरप्रीत सिंह हैप्पी का कहना है कि पीएम मोदी और चंडीगढ़ के प्रशासक के आह्वान पर किराएदारों का किराया माफ किया। अब गांव के लोग परेशानी में आ गए हैं। प्रशासन गांव के लोगों पर ध्यान दे। गांव दड़वा निवासियों में हरपेज सिंह, जसविंदर सिंह और गुरदीप सिंह का कहना है कि किरायादारों के नहीं आने से परेशानी हो रही है।
बिजली-पानी बिल माफ करे प्रशासन
गांव हल्लोमाजरा के निवासी और पंचायत समिति के पूर्व चेयरमैन दीदार सिंह का कहना है कि मकान मालिक भी आर्थिक संकट में आ गए हैं। मकान खाली हो गए हैं। किराया नहीं आएगा तो घर कैसे चलेगा। पचास प्रतिशत का घाटा है। उनका कहना है कि प्रशासन मकान मालिकों के साथ-साथ गांव में बिजली और पानी का बिल माफ करे तो ही ही राहत मिलेगी।
गांव बहलाना निवासी और मार्केट कमेटी के पूर्व डायरेक्टर जीत सिंह बहलाना का कहना है कि गांव के लोग काफी संकट में आ गए हैं। प्रशासन की मदद के बिना गुजारा नहीं है। बिजली-पानी के बिल माफ होने चाहिए। उन्होंने कहा कि मकान मालिकों के पास किराए के अलावा कुछ भी नहीं है।