हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात करने के बाद मुख्यमंत्री की तारीफों के पुल बांधते रहे नवजोत सिंह सिद्धू अब भगवंत मान की कार्यप्रणाली से नाराज हो गए हैं। उन्होंने मंगलवार को एक के बाद एक लगातार पांच ट्वीट करके मान सरकार को बिजली, किसान मुआवजे, एमएसपी के मुद्दों पर घेरा।
सिद्धू ने पहले ट्वीट में लिखा- आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार द्वारा केवल घोषणाएं... और कोई मतलब नहीं। आप जितना चबा नहीं सकते, उससे ज्यादा काटते क्यों हैं। गेहूं उत्पादक किसानों को बोनस देने का मुख्यमंत्री का वादा कहां है? क्या सरकार के पास वादा किया गया बोनस देने के लिए 5000 करोड़ रुपये हैं? क्या सरकार के पास किसानों को आठ घंटे बिजली देने की क्षमता है? अब तक दालों और मूंग पर एमएसपी को अधिसूचित क्यों नहीं किया गया?
उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा- जब तक बाजार मजबूत नहीं होगा, किसानों का विरोध जारी रहेगा। पंजाब, ओवरड्राफ्ट पर चल रहा है और बिना किसी नीति के बजट आवंटन के साथ, किसानों का उत्थान नहीं कर सकता। वित्तीय संकट जितना बड़ा होगा, कानून-व्यवस्था की स्थिति उतनी ही अधिक बिगड़ेगी। आज पंजाब केंद्र सरकार के रहमोकरम पर है।
नवजोत सिद्धू ने तीसरे ट्वीट में मान सरकार को हालात सुधारने के उपाय भी सुझाए। उन्होंने लिखा- इसका हल यह है कि व्यापार के लिए सीमाएं खोली जाएं, इससे एक दिन में किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। किसानों को एकजुट करने के लिए सहकारी समितियां बनाएं, ताकि वह बाजार तक पहुंच और नियंत्रण बना सकें। माफिया की जेब से पैसा निकालकर राज्य के लिए आय उत्पन्न करें। सभी नीतियां बजट समर्थित ही बनाएं।
सिद्धू ने अगले ट्वीट में लिखा- सरकार को किसानों को 10 जून से धान की बुआई की अनुमति देनी चाहिए, क्योंकि विलंब फसल में नमी अधिक होती है, जिससे मूल्य कम होता है। क्या पीक सीजन में बिजली बचाने के लिए सरकार ऐसा कर रही है? किसानों को ही हमेशा परेशान क्यों होना पड़ता है? यदि सरकार वास्तव में विविधीकरण के बारे में गंभीर है तो उसने बासमती पर एमएसपी की घोषणा क्यों नहीं की?