कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धू के इस्तीफे पर देर शाम तक कोई प्रतिक्रिया तो नहीं दी लेकिन अंदर खाने घमासान शुरू हो गया है। नेतृत्व ने जिन नेताओं के कहने पर सिद्धू को अध्यक्ष बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी वे भी अब खुद को बचाते घूम रहे हैं। हालांकि सिद्धू को अध्यक्ष बनवाने में अहम भूमिका महासचिव प्रियंका गांधी की थी। दबी जुबान अब उनके फैसले पर सवाल उठाने लगे हैं। पंजाब कांग्रेस के असंतुष्ट नेता सिद्धू को लेकर लगातार अपनी आवाज नेतृत्व तक पहुंचा रहे थे, अब उन्हें फिर नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है।
मैं तो पहले ही कह रहा था सिद्धू स्थिर नहीं: कैप्टन
पंजाब से दिल्ली के लिए निजी यात्रा पर निकले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू के इस्तीफे पर यात्रा के बीच से ही ट्वीट किया ‘मैं तो पहले ही कह रहा था वो स्थिर आदमी नहीं है। पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य के लिए सिद्धू फिट नहीं।’
सिद्धू के इस्तीफे की वजह
- सीएम न बनाए जाने की नाराजगी
- मंत्रियों के विभागों के बंटवारे में नहीं चली
- डीजीपी व एडवोकेट जनरल पसंद के नहीं बनवा पाए
- मुख्यमंत्री चन्नी ने भी बना ली थी दूरी
कैबिनेट मंत्री परगट सिंह ने पटियाला में नवजोत सिंह सिद्धू के घर रखी बैठक में हिस्सा लेने बाद कहा कि एक-दो मसले हैं, जिन्हें लेकर सिद्धू को शिकायत है लेकिन उम्मीद है कि इन मसलों को जल्द हल कर लिया जाएगा। कोई बड़ी बात नहीं है। कई बार आपस में गलतफहमी हो जाती है लेकिन मिल बैठकर सभी गलतफहमियों को दूर कर लिया जाएगा।
नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। जल्द ही मामले को सुलझा लिया जाएगा। 3-4 मुद्दे हैं, पार्टी फोरम में उनकी चर्चा हो रही है, आलाकमान उनका समाधान करेगा। कांग्रेस विधायक बावा हेनरी।
कैबिनेट मंत्री अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने नवजोत सिंह सिद्धू से मुलाकात की और कहा कि कुछ छोटे मुद्दे हैं, जो कुछ गलतफहमियों से उत्पन्न हुए हैं और कल हल किए जाएंगे।
विभागों के बंटवारे के तीन घंटे बाद इस्तीफा
मंगलवार को दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों के विभागों का एलान किया। इसके तीन घंटे बाद तीन बजे सिद्धू ने प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्रियों के विभागों के निर्धारण में नवजोत सिद्धू की सलाह को ज्यादा महत्व नहीं दिया। यही बात सिद्धू को अखर गई और उनके इस्तीफे का कारण बनी।
सिद्धू की न पहले सीएम से बनी, न दूसरे से
नवजोत सिद्धू की कार्यशैली पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। न तो पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से अच्छे संबंध बनें और न ही अब दूसरे मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से। माना जा रहा है कि सिद्धू दोनों मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल के दौरान सरकार को अपने ढंग से चलाने की कोशिशों में जुटे रहे। उन्होंने कैप्टन को कई फैसले लेने के लिए कहा, जिन्हें कैप्टन ने नजरअंदाज कर दिया था। वहीं, अब जब चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है। अचानक चन्नी के अपने स्तर पर निर्णय लेने और सलाह को अनदेखा किया जाना सिद्धू को नागवार गुजरा है।
राज्य का गृह विभाग जोकि अमूमन मुख्यमंत्री के अधीन ही रहता है, इस बार मुख्यमंत्री चन्नी द्वारा उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा को सौंपे जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरु हो गई हैं लेकिन इसके पीछे का कारण सांसद रवनीत बिट्टू ने बताया। बिट्टू ने कहा कि सुखजिंदर रंधावा के पास कैप्टन सरकार के समय भी जेल विभाग था और इस तरह वे पहले से ही पुलिस विभाग का करीब आधा कामकाज देख रहे थे। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें अब पूरा गृह विभाग दे दिया गया है।
इस्तीफे पर पुनर्विचार करें नवजोत सिद्धू: खैरा
सुखपाल सिंह खैरा ने नवजोत सिंह सिद्धू से पंजाब के व्यापक हित में अपने इस्तीफे पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से भी अपील की है कि सिद्धू द्वारा उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए। मंगलवार को जारी एक बयान में खैरा ने जहां सिद्धू से अपने इस्तीफे पर पुनर्विचार करने की अपील की तो वहीं कांग्रेस हाईकमान से भी अपील की है कि वह सिद्धू का इस्तीफा मंजूर न करें।
खैरा ने कहा कि चूंकि पंजाब में अगले 4-5 महीनों में चुनाव होने हैं, ऐसे में पार्टी आलाकमान और नवजोत के बीच गतिरोध का सौहार्दपूर्ण समाधान खोजना अत्यंत आवश्यक है। खैरा ने कहा कि अगर पार्टी आलाकमान सिद्धू द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों पर ध्यान देकर उन्हें वापस ले लेती है तो इससे पंजाब में कांग्रेस पार्टी ही मजबूत होगी।