पंजाब कांग्रेस की श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर श्री करतारपुर साहिब जाकर दर्शन करने की मुहिम भी सियासी गुटबाजी का शिकार हो गई। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू को अपने साथ 18 नवंबर को ही श्री करतारपुर साहिब दर्शन के लिए ले जाना चाहते थे लेकिन सिद्धू अपने समर्थक गुट के साथ जाने के इच्छुक थे। इसलिए उन्होंने अलग से जाने की योजना बनाई।
वहीं, सिद्धू के रुख को देखते हुए पंजाब सरकार ने केंद्रीय विदेश मंत्रालय को 18, 19 व 20 नवंबर के लिए जिन मंत्रियों व नेताओं की सूची भेजी, उनमें नवजोत सिद्धू का नाम तीसरी सूची में छठे स्थान पर दिया, जिसके चलते विदेश मंत्रालय ने उन्हें 20 नवंबर को करतारपुर जाने की अनुमति दी है। हालांकि सिद्धू को 18 व 19 नवंबर को करतारपुर जाने की अनुमति न मिलने के लिए कांग्रेस पार्टी विदेश मंत्रालय को जिम्मेदार ठहरा रही है।
माना यह जा रहा है कि पिछली बार जब सिद्धू पाकिस्तान गए थे तो करतारपुर कॉरिडोर खोलने के मुद्दे पर पाकिस्तानी सेना के जनरल बाजवा से गले मिले थे, जिसे देखते हुए विदेश मंत्रालय ने इस बार सिद्धू को पाक (करतारपुर) भेजने में परहेज किया लेकिन सूत्रों के अनुसार सिद्धू अपने समर्थक मंत्रियों, विधायकों और नेताओं के साथ अलग से दर्शन की तैयारी कर रहे थे।
अब 20 नवंबर को नवजोत सिद्धू के साथ उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, कैबिनेट मंत्री परगट सिंह, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, संगत सिंह गिलजियां, प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष व विधायक कुलजीत सिंह नागरा, पवन गोयल के अलावा पार्टी मामलों के पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी श्री करतारपुर साहिब जाएंगे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री चन्नी ने सिद्धू को अपने साथ चलने को कहा था लेकिन सिद्धू तैयार नहीं हुए। इस पर चन्नी सरकार ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष और आप विधायक हरपाल सिंह चीमा के साथ जाने की सलाह दी लेकिन इस पर चीमा ने इनकार कर दिया। वे अपने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष भगवंत मान और अन्य आप विधायकों के साथ श्री करतारपुर साहिब जाने की तैयारी कर चुके थे।
मंगलवार को पंजाब कांग्रेस भवन में प्रेस वार्ता के दौरान सिद्धू ने एलान किया था कि वह श्री करतारपुर साहिब जाने के लिए तुरंत आवेदन कर रहे हैं। सिद्धू 19 नवंबर को गुरुपर्व के मौके पर दर्शन करने के इच्छुक थे लेकिन उन्हें यह मौका नहीं मिल पाया।