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टूटा सपना : नवजोत सिद्धू की हर ख्वाहिश को कैप्टन की ना, पद भी नहीं मिलेगा, तरजीह भी नहीं 

Mon, 22 Mar 2021 12:31 PM IST
निवेदिता वर्मा हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ नवजोत सिद्धू। - फोटो : फाइल फोटो
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कांग्रेस ने पंजाब के अपने फायरब्रांड नेता नवजोत सिंह सिद्धू को उनके हाल पर छोड़ दिया है। यह संकेत पिछले बुधवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिद्धू के बीच चाय पर हुई मुलाकात के नतीजों से मिले हैं। सिद्धू जहां पंजाब कांग्रेस में कैप्टन के समकक्ष ओहदा और रुतबा चाहते हैं, वहीं कैप्टन ने चाय पर हुई मुलाकात के अगले ही दिन अप्रत्यक्ष रूप से साफ कर दिया कि वे न तो नवजोत सिद्धू को उनकी पसंद का कोई ओहदा देंगे और न ही उन्हें पंजाब कांग्रेस में ही कोई तरजीह मिलेगी।
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नवजोत सिद्धू ने जुलाई 2019 में कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से वे लगातार पार्टी हाईकमान पर दबाव बना रहे थे। 19 मार्च को एक ओर प्रयास करते हुए उन्होंने प्रियंका गांधी से मुलाकात की लेकिन इस बार भी सिद्धू के हाथ कुछ नहीं लगा है। बीते डेढ़ साल से हाईकमान द्वारा उन्हें कोरे आश्वासन ही दिए जा रहे हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस के पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत सिद्धू और कैप्टन के बीच विवाद खत्म करने की पुरजोर कोशिशों में लगे थे। अब उन्होंने भी चुप्पी साध ली है।
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बीते डेढ़ साल के दौरान कांग्रेस आलाकमान के सिद्धू को दिए जा रहे आश्वासनों, पार्टी के प्रदेश प्रभारी द्वारा की जा रही सुलह की कोशिशों से यह उम्मीद की जा रही थी कि 2022 के चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस के भीतर सबसे चर्चित इस मनमुटाव को समाप्त करके पूरी पार्टी एक मंच पर नजर आएगी। लेकिन 17 मार्च की कैप्टन-सिद्धू की बैठक ने साफ कर दिया है कि पंजाब कांग्रेस में सिद्धू को हाशिए पर धकेल दिया गया है। उन्हें प्रदेश की सियासत में कांग्रेस कोई बड़ा रुतबा देने को तैयार नहीं है। बकौल कैप्टन कठिन समय में आपको अपनी इच्छाओं को एक तरफ करना होगा और पार्टी के साथ खड़ा होना पड़ेगा। 

सिद्धू के हताशा और मायूसी भरे ट्वीट
पिछले हफ्ते कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ मुलाकात के बाद से नवजोत सिद्धू द्वारा किए जा रहे ट्वीट्स में उनका दर्द और हताशा साफ झलक रहा है। 17 मार्च की बैठक के बाद जहां सिद्धू ने दो ट्वीट कर अपने कड़े रुख के संकेत दिए थे, वहीं 18 मार्च को कैप्टन द्वारा प्रेस कांफ्रेंस में सिद्धू को लेकर जिस तरह अपना रुख साफ किया गया, उसके बाद उनकी मायूसी, हताशा और नाराजगी उभरकर सामने आ रही है। 

18 मार्च को सिद्धू ने दोपहर को ट्वीट किया- तिनके से हल्की रुई, रुई से हल्का मांगने वाला आदमी ..... न अपने लिए मांगा था , न मांगा है और न मांगूंगा ..! अगले ही दिन सिद्धू ने एक और ट्वीट किया- ‘हुनर होगा तो दुनिया कदर करेगी ... एड़ियां उठाने से किरदार ऊंचे नहीं होते ..!!! 20 मार्च को सिद्धू ने जो ट्वीट किया, उसमें उनकी हताशा साफ छलक गई। उन्होंने लिखा, ‘खुद को इतना लायक भी न बनाना ... तमाम उम्र कोहनूर ने तन्हा गुजारी है।’ ऐसा ही एक ट्वीट सिद्धू ने रविवार को भी किया- ‘वतन से इश्क में अपना मकाम पैदा कर, नया जमाना, नए सुबह शाम पैदा कर ...!! तेरा इतिहास अमीरी नहीं , बाबा नानक की फकीरी है, खुदी ना बेच, फकीरी में नाम पैदा कर ...!!’
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