बीते डेढ़ साल के दौरान कांग्रेस आलाकमान के सिद्धू को दिए जा रहे आश्वासनों, पार्टी के प्रदेश प्रभारी द्वारा की जा रही सुलह की कोशिशों से यह उम्मीद की जा रही थी कि 2022 के चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस के भीतर सबसे चर्चित इस मनमुटाव को समाप्त करके पूरी पार्टी एक मंच पर नजर आएगी। लेकिन 17 मार्च की कैप्टन-सिद्धू की बैठक ने साफ कर दिया है कि पंजाब कांग्रेस में सिद्धू को हाशिए पर धकेल दिया गया है। उन्हें प्रदेश की सियासत में कांग्रेस कोई बड़ा रुतबा देने को तैयार नहीं है। बकौल कैप्टन कठिन समय में आपको अपनी इच्छाओं को एक तरफ करना होगा और पार्टी के साथ खड़ा होना पड़ेगा।
सिद्धू के हताशा और मायूसी भरे ट्वीट
पिछले हफ्ते कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ मुलाकात के बाद से नवजोत सिद्धू द्वारा किए जा रहे ट्वीट्स में उनका दर्द और हताशा साफ झलक रहा है। 17 मार्च की बैठक के बाद जहां सिद्धू ने दो ट्वीट कर अपने कड़े रुख के संकेत दिए थे, वहीं 18 मार्च को कैप्टन द्वारा प्रेस कांफ्रेंस में सिद्धू को लेकर जिस तरह अपना रुख साफ किया गया, उसके बाद उनकी मायूसी, हताशा और नाराजगी उभरकर सामने आ रही है।
18 मार्च को सिद्धू ने दोपहर को ट्वीट किया- तिनके से हल्की रुई, रुई से हल्का मांगने वाला आदमी ..... न अपने लिए मांगा था , न मांगा है और न मांगूंगा ..! अगले ही दिन सिद्धू ने एक और ट्वीट किया- ‘हुनर होगा तो दुनिया कदर करेगी ... एड़ियां उठाने से किरदार ऊंचे नहीं होते ..!!! 20 मार्च को सिद्धू ने जो ट्वीट किया, उसमें उनकी हताशा साफ छलक गई। उन्होंने लिखा, ‘खुद को इतना लायक भी न बनाना ... तमाम उम्र कोहनूर ने तन्हा गुजारी है।’ ऐसा ही एक ट्वीट सिद्धू ने रविवार को भी किया- ‘वतन से इश्क में अपना मकाम पैदा कर, नया जमाना, नए सुबह शाम पैदा कर ...!! तेरा इतिहास अमीरी नहीं , बाबा नानक की फकीरी है, खुदी ना बेच, फकीरी में नाम पैदा कर ...!!’