स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिद्धू ने विभाग का कामकाज समझने के बाद अब फ्रंटफुट पर बैटिंग शुरू कर दी है। सिद्धू के आदेश पर मंगलवार को विभिन्न नगर निगमों और काउंसिलों में तैनात 14 सचिवों को डिमोट करके सुपरिंटेंडेंट बना दिया गया। इससे पहले सिद्धू के ही निर्देश पर चीफ विजिलेंस अफसर और चीफ टाउन प्लानर पर भी गाज गिर चुकी है।
सिद्धू ने आते ही अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए प्रमोशनों को रिव्यू करना शुरू कर दिया था। उनकी सबसे खास नजर कार्यकाल के अंत में तत्कालीन निकायमंत्री अनिल जोशी द्वारा किए गए प्रमोशनों पर थी। जोशी ने चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले बड़ी संख्या में प्रमोशन किए थे। विभाग में यह चर्चा थी कि उस दौरान डायरेक्टर के पद पर तैनात एक अधिकारी ने इस स्थिति से बचने को अपनी ड्यूटी किसी और जिले में लगवा ली थी।
जबकि, प्रमुख सचिव छुट्टी पर चले गए थे और चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद ही लौटे थे। अब नई सरकार में जैसे-जैसे पुराने प्रमोशनों की परतें खुल रही हैं, कार्रवाई होती जा रही है। पहले सिद्धू ने चीफ विजिलेंस अफसर अनिल कांसल को पद से हटा दिया था। उसके बाद चीफ टाउन प्लानर हेमंत बत्रा को डिमोट करके होशियारपुर का एसटीपी लगा दिया।
अब विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सतीश चंद्रा की ओर से मंगलवार को 14 सचिवों को डिमोट करके सुपरिंटेंडेंट नियुक्त करने के आदेश जारी किए गए हैं। विभाग की पड़ताल में आया है कि ये लोग गलत ढंग से प्रमोट किए गए थे। डिमोट किए गए सचिवों में जालंधर की ललिता, दिनेश ज्योति, विक्रांत, अमृतसर के सुभाष चंद्र, सुशांत भाटिया, विशाल, बठिंडा के कुलविंदर सिंह व तेजिंदर पाल सिंह, मोगा के अमरदीप सिंह, मोहाली के रणजीत कुमार, पटियाला के अजय कुमार, लुधियाना के जसदेव सिंह और सुरिंदर पाल सिंह, फगवाड़ा के नीरज जैन शामिल हैं। माना जा रहा है कि अभी कई और लोगों पर गाज गिरेगी।