कांग्रेस मंत्री नवजोत सिद्धू का चल रहा एपिसोड इस हफ्ते खत्म हो सकता है। दरअसल, सिद्धू ने अब नया कार्यभार संभालने के लिए एक शर्त रखी है। सिद्धू हाईकमान को अपना फॉर्मूला पहले ही दे चुके हैं। इस सप्ताह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करने की उम्मीद है।
कैप्टन को इस सप्ताह नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एक अन्य केंद्रीय मंत्री से भी मुलाकात करनी है, जिसके लिए मंगलवार या बुधवार को समय मांगा गया है। पीएमओ से समय मिलते ही कैप्टन का कार्यक्रम फाइनल हो जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और अहमद पटेल को भी इस बारे में सूचना दी जा चुकी है। राहुल गांधी से मीटिंग के दौरान ही सिद्धू को लेकर चला आ रहा गतिरोध खत्म होने की उम्मीद है।
लगभग दो हफ्ते गुजर जाने के बावजूद सिद्धू ने बिजली विभाग का कार्यभार नहीं संभाला है। सूत्रों के मुताबिक, सिद्धू पहले ही हाईकमान के सामने अपना पक्ष रख चुके हैं। सिद्धू की अहमद पटेल के साथ भी बैठक हो चुकी है। इसमें उन्होंने दलील दी है कि अगर चुनाव और विभाग की परफॉर्मेंस के आधार पर उनका महकमा बदला गया है तो बाकी मंत्रियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
जिन मंत्रियों के हलकों में कांग्रेस हारी है, उनके खिलाफ कुछ क्यों नहीं किया गया। जिन मंत्रियों की परफॉर्मेंस अपने विभाग में ठीक नहीं है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। सभी मंत्रियों के लिए एक ही पैमाना होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो वह अपना कार्यभार संभालने को तैयार हैं।
कैप्टन माने तो मंत्रिमंडल में होगा फेरबदल
माना जा रहा है कि हाईकमान कैप्टन के सामने सिद्धू का प्रस्ताव रखेगा। अगर कैप्टन ने सहमति जताई तो राहुल से बैठक के दौरान ही मंत्रिमंडल में फेरबदल पर मोहर लग सकती है। सीएम खुद अब इस विवाद का अंत चाहते हैं। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ भी दिल्ली में ही हैं। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के बाद सीएम ने सिद्धू से निकाय विभाग लेकर बिजली विभाग दे दिया था। सीएम का कहना था कि निकाय विभाग द्वारा काम न करवाने के कारण शहरों में पार्टी हारी है।
सिद्धू की दलील
नवजोत सिद्धू ने पार्टी हाईकमान से कहा है कि अरुणा चौधरी, सुंदर शाम अरोड़ा और राणा गुरमीत सोढी के हलकों में पार्टी बुरी तरह हारी है। फिर भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। खराब प्रदर्शन वाले मंत्रियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने हाईकमान को भाजपा से सबक लेने को कहा है। जिस तरह भाजपा ने नॉन परफॉर्मर हटा दिए, अभी से 2024 के चुनाव की तैयारी कर रही है, कांग्रेस को भी इससे सीखना चाहिए। सिद्धू की दलील है कि कांग्रेस को पुराने ढर्रे से निकलना होगा। कई बार जीतना मंत्री बनने का आधार नहीं हो सकता। मंत्री उन्हें बनाना चाहिए जो परफॉर्मेंस दें और पार्टी की छवि बनाएं। अब लोग जागरूक हैं, रिजल्ट मांगते हैं।
सोनी ने नहीं संभाला विभाग
लोकसभा चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान ओपी सोनी से शिक्षा विभाग लेकर उन्हें मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट दिया गया था। सिद्धू की तरह ही सोनी ने भी अब तक अपना कार्यभार नहीं संभाला है। सोनी को सीएम का करीबी माना जाता है। इसके बावजूद उनके कार्यभार न संभालने से साफ है कि उन्हें भी कहीं न कहीं यह उम्मीद है कि फिर मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। ऐसे में कोई अच्छा विभाग उन्हें मिल सकता है।