विश्व जल रहा है, हिमनद पिघल रहा है, त्याग जल रहा है, पराग जल रहा है, हर राग जल रहा है, शैतान छल रहा है, चक्रवात का कहर क्यों सुनामी की लहर क्यों, भूकंप क्यों है आया, कैसी है काली छाया।
स्टेज पर गूंजते सवालों के बीच साकार हो उठती है अंधेर नगरी। अंधेर नगरी की शुरुआत होती है गायक मंडल और सूत्रधार के साथ जो अंधेर नगरी के एक महंत और उसके चेले की कहानी सुनाते हैं। एक चेला पश्चिम में टिक जाता है।
गुरू समझाते हैं कि बसिए ऐसे देश कभी न जहां पर बरसे सोना, दुख से प्राण वहां तो जाए एक दिन पड़ता रोना। वह नहीं मानता है और फिर एक दीवार गिरने और बकरी के मर जाने से फांसी पर लटक जाता है।
भारतेंदु हरिश्चंद्र की लिखे नाटक अंधेर नगरी पर आधारित यह नौटंकी की प्रस्तुति सेलिब्रेटी नौटंकी फेस्टिवल के दौरान किया गया। अंधेर नगरी को नौटंकी शैली में किया गया तो इसके निर्देशक कोण में सबसे ज्यादा ध्यान रखा गया कि ब्रेन ड्रेन को उजागर करें।
ऐसे गिरी दीवार
अंधेर नगरी यानी पश्चिम में दीवार गिरने से एक बकरी मर जाती है और वहां का राजा न्याय के लिए सबसे पहले जिसकी दीवार होती है उसको बुलाता है तो वह कहता है कि जिस कारीगर ने बनाया उसका दोष है, कारीगर कहता है कि चूने वाले का दोष है, चूने वाले ने कहा कि भिश्ती की गलती है क्योंकि पानी ज्यादा डाला।
भिश्ती ने कहा कि कसाई की गलती है। कसाई ने कहा कि मैं क्या करता गड़रिया मैने बड़ी भेड़ दी थी। गड़रिया ने कहा कि उसी समय कोतवाल ने सवारी निकाली और उसी समय भेड़ बदल गई।
कोतवाल ने कहा कि नगर व्यवस्था के लिए सवारी निकाली। सनकी राजा सारे नगर को फांसी पर चढ़ाने की योजना बनाता है, लेकिन मंत्री की दखल से कोतवाल को दोषी बनाकर नगर को बचाता है।
अंधेर नगरी में एक और अंधेरा तब दिखता है जबकि कोतवाल का गला पतला निकल गया और फंदा बड़ा। ऐसे में सनकी राजा उसी साइज का आदमी ढूंढने को कहता है और इसी में फंस जाता है गोवर्धन।
ये हैं नाटक के पात्र
धर्मेश दीक्षित
सोनम सेठ
सोनाली चक्रवर्ती
नीरज अग्रवाल
धीरज अग्रवाल
सचिन केसरवानी
सोनी कुमार गुप्ता
शीला
मोहमम्मद सरवर
राजा के रोल में अतुल यदुवंशी
परिकल्पना और निर्देशन-अतुल यदुवंशी
संगीत-सुरेश चंद्र और राम नगीना, दिलीप कुमार गुलशन, रामानंद