एनएच 21 और मध्य मार्ग पर ठेके होंगे बंद
शराब पीने वालों के लिए थोड़ी राहत की खबर है। सड़क किनारे बने शराब के ठेकों को बंद करने पर स्थिति साफ हुई है। अब नेशनल हाइवे 21 को छोड़कर सभी जगहों पर ठेके जारी रहेंगे। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन के स्टेट हाईवे डी नोटिफाई करने के फैसले पर मुहर लगाते हुए मध्य मार्ग तथा एनएच 21 को छोड़कर बाकी सभी स्थानों पर ठेके बदस्तूर जारी रखने की अनुमति दे दी है।
बुधवार को हाईकोर्ट का यह फैसला यूटी प्रशासन के लिए राहत की बड़ी खबर लेकर आया। स्टेट हाईवे को परिभाषित करने के लिए कोई कानून न होने के अभाव में हाईकोर्ट ने प्रशासन के फैसले को अपनी मंजूरी दे दी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जहां एक ओर याची की दलीलों को सुना तो वहीं प्रशासन के पक्ष को कानूनी बाध्यता की कसौटी पर परखा।
इसके बाद शहर की भौगोलिक स्थिति, प्रावधान के अभाव के चलते बनी स्थिति व अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को राहत दी है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि हरियाणा, पंजाब और यूटी में स्टेट हाईवे को लेकर कोई कानून ही नहीं है तो यह फैसला कानून के खिलाफ नहीं हो सकता है।
यहां चलते रहेंगे ठेके
एनएच 21 और मध्य मार्ग पर ठेके होंगे बंद
जस्टिस राजेश बिंदल एवं जस्टिस हरिंदर सिंह सिधु की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में स्टेट हाईवे को परिभाषित करने को लेकर कोई कानून ही नहीं बनाया गया है। कानून के अभाव में सरकार के पास अधिकार है कि वो इन स्टेट हाईवे को नोटिफाई और डी-नोटिफाई कर सकती है।
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान और कर्नाटक में इसके लिए कानून बनाया गया है और ऐसे में सभी राज्यों को एक नजर से नहीं देखा जा सकता है। ऐसे में हाई कोर्ट ने इस याचिका को आधारहीन करार दे ख़ारिज कर दिया है।
यहां चलते रहेंगे ठेके
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के चलते शहर के 99 में से 84 शराब के ठेके बंद होना तय हो गया था। कारण यह कि शहर के सभी सेक्टर 800 बाय 1200 मीटर के थे और ज्यादातर सेक्टर सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिभाषित ठेका प्रतिबंधित क्षेत्र में आ रहे थे। स्टेट हाईवे की परिभाषा के अनुरूप प्रशासन ने बताया था कि इससे 84 ठेके बंद हो जाएंगे जिससे तकरीबन 200 करोड़ का राजस्व नुकसान होगा।
अब हाईकोर्ट ने प्रशासन द्वारा मध्य मार्ग और एनएच 21 को छोड़ बाकी सभी सड़कों को मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड़ घोषित करने पर मुहर लगा दी है जिसके चलते इन दोनों स्थानों को छोड़कर बाकी सभी में ठेके खुले रहने का रास्ता साफ हो गया है।
यह रही प्रशासन की दलील
हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा था कि आखिर किस आधार पर हाईवे को परिभाषित किया जाता है। इसपर यूटी, हरियाणा व पंजाब ने कहा कि स्टेट हाईवे की कोई परिभाषा निर्धारित नहीं है इसे महत्व के आधार पर दर्जा दे दिया जाता है। प्रशासन ने कहा कि 2005 में हाईवे इसलिए नोटिफाई किए गए थे ताकि इन सड़कों का सही विकास हो सके। अब इन्हें डी-नोटिफाई करना जरूरी हो गया है।
सड़कों के लिए राजस्व की दलील आई काम
प्रशासन ने कहा कि वर्तमान में शहर में 99 ठेके हैं। यदि वी-1, वी-2 और वी-3 सड़कों का स्टेट हाईवे का दर्जा खत्म नहीं किया गया तो ऐसे में 84 ठेके बंद हो रहे हैं। इन्हें बचाने के लिए एक विकल्प यह बचता है कि इन ठेकों को पेराफेरी में मौजूद गांवों में शिफ्ट कर दिया जाए। यह बेहद बड़ी समस्या खड़ा कर देगा क्योंकि यह शराब के ठेके लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति खराब करने का कारण बन सकते हैं।
सड़कों के लिए राजस्व की दलील आई काम
यूटी प्रशासन ने डि नोटिफिकेशन पर अपनी दलील देते हुए कहा था कि पिछले साल 202 करोड़ का राजस्व ठेकों से प्राप्त हुआ था। शहर 114 स्क्वेयर किलोमीटर क्षेत्र में फैला है जो बहुत छोटा क्षेत्र है और शराब से जो राजस्व आता है वह शहर के विकास के लिए लगाया जाता है।
सड़कें इसका सबसे अहम हिस्सा हैं और इस राजस्व से ही उनके विकास का कार्य किया जाता है। हाईवे डी नोटिफाई नहीं किए गए तो शहर व सड़कों का विकास रुक जाएगा क्योंकि एक्साईज किसी भी राज्य या यूटी के राजस्व का सबसे अहम हिस्सा होता है।
बैठक कर लिया गया था डी नोटिफिकेशन का फैसला
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद ठेकों से आने वाली आय बंद न हो इसके लिए प्रशासक के सलाहकार की अध्यक्षता में एक सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। जिसमे एडिशनल एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर सहित चीफ इंजीनियर और चीफ आर्किटेक्ट भी शामिल थे। इस बैठक में 2005 की वह नोटिफिकेशन डी नोटिफाई कर दी गई जिससे सभी वी-1, वी-2 और वी-3 सड़कों का स्टेट हाईवे का दर्जा समाप्त कर दिया गया।