आज राष्ट्रीय व्याकरण दिवस है। यह दिन संचार में व्याकरण के सही इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य मौखिक और लिखित भाषा में सही व्याकरण का इस्तेमाल करना सीखना और उसे बढ़ावा देना है।
इसको लेकर चंडीगढ़ की हिंदी और अंग्रेजी की अध्यापिकाओं से बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया ने बच्चों के व्याकरण को खराब किया है। इसलिए वह न तो हिंदी को सही लिख पा रहे हैं और न ही अंग्रेजी को।
बच्चों को शाॅर्ट में लिखने की आदत पड़ी
अग्रेंजी में बच्चे टेंसेस और वोकेबलरी में गड़बड़ कर रहे हैं। इसमें बच्चे समानर्थी शब्द तो प्रयोग करते हैं, लेकिन वह शब्द किसी न किसी चीज को प्वाइंट आउट करता है। किसी भी प्रभावशाली बात को कहने के लिए एक विशेष प्रभवाशाली समानार्थी शब्द का प्रयोग करना जरूरी है, नहीं तो लाइन का अर्थ बदल जाता है। बच्चे को सोशल मीडिया पर शॉर्ट में लिखने की आदत पड़ गई है। ऐसे में सही शब्द प्रयोग नहीं करते हैं। वह लंबी लाइन लिखने से बचने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लिखने की बजाय दूसरों के रिप्लाई देखने की बच्चों की ज्यादा रूचि रहती है। उनके शॉर्ट तरीके से लिखने को स्वीकार भी किया जा रहा है, इसलिए बच्चे भी लिख रहे हैं।
- संदीप कौर, सेक्टर-22 जीएमएसएसएस
लिखित अभ्यास नहीं हो रहा
बच्चे हिंदी को दूसरे नंबर की भाषा समझने लगे हैं। वह राष्ट्र भाषा हिंदी की बजाय अंगेजी बोलने पर गर्व महसूस करते हैं। अन्य भाषा के प्रभाव और पठन व लेखन कौशल की कमी के कारण विद्यार्थियों के लेखन में बहुत अधिक त्रुटियां हो रही हैं। विद्यार्थियों को प्रत्यय, उपसर्ग, संज्ञा, सर्वनाम, पर परिचय और विशेषण पता नहीं चल पाता। उन्हें छोटी-छोटी अभ्यास पुस्तिकाएं या कार्य विधि बनाकर दी जाए,
ताकि वह एक रुचिकर तरीके से अपने विषय को समझते हुए व्याकरण की बारीकियां को समझ सके। उच्चारण संबंधी कोई गलती होती है तो उसे तभी सुधारा जाए, इससे ही वह आगे गलतियां करने से बचेंगे। नए लेखक व कवि तभी बन पाएंगे, जब उनकी भाषा और व्याकरण संबंधी त्रुटियों को दूर किया जा सकेगा। इसके लिए लिखित अभ्यास बहुत आवश्यक है।
- जसविंदर कौर, सेक्टर-22 जीएमएसएसएस