चाहे हजार आरोपी छूट जाएं, लेकिन एक बेगुनाह को फांसी ना हो। इस संदेश को जीवंत किया नाटक गिल्टी और नॉट गिल्टी ने।
टीएफटी थियेटर नेशनल फेस्टिवल के तीसरे दिन स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन, रोहतक की टीम ने संदीप महाजन के निर्देशन में अपना नाटक पेश किया। यह नाटक अमेरिकी लेखक रेगीनाल्ड रोस ने लिखा था।
कहानी सीन दर सीन आगे बढ़ी
लगभग दो घंटे के नाटक में सिर्फ एक टेक में पूरा हुआ। नाटक शुरू होते ही रोशनी पूरी तरह से बंद कर दी गई। ...फिर जज की आवाज आई... जिसमें वह एक 19 साल के लड़के की किस्मत का फैसला 10 लोगों पर छोड़ता है। ...और कहता है कि सभी का फैसला एक ही होना चाहिए, या तो लड़के को छोड़ दिया जाए या फिर फांसी दे दी जाए। यह दस लोग कोर्ट में मौजूद सभी गवाहों को सुन कर अपनी राय के लिए एक कमरे में जाते हैं और यहीं से कहानी आगे बढ़ती है।
मंच का पर्दा खुलता है और सेट में 10 कुर्सियां और लंबे टेबल के इर्द-गिर्द एक पुलिस कर्मी चेकिंग के लिए आता है। धीरे-धीरे ज्यूरी के दस सदस्य भी आते हैं।
सभी का वोट होता है, लेकिन एक ज्यूरी (जो आर्किटेक्चर है) लड़के को बेकसूर बताता है। बाकी 9 लोग खफा हो जाते हैं। वह केस से जुड़े गवाहों की गवाही पर अपने शक की वजह बताता है। धीरे-धीरे केस में सभी लोग लड़के को बेगुनाह मानते हैं और उसे नॉट गिल्टी बताते है।
नाटक के कुछ खूबसूरत अंश
स्टेज में कुल 10 कलाकार थे, जिन्हें बराबर डॉयलाग दिए गए, डायरेक्टर ने छोटी स्टेज में 10 लोगों से बेहद शानदार ब्लॉकिंग करवाई। कोई भी एक दूसरे से जूझता नहीं दिखाई देता है।
नाटक में एक वकील और छोटे तबके से निकले हुए व्यक्ति के संवाद अच्छा सोशल मैसेज देते हैं और वकील का गुस्से में टेबल पर चढ़ना काफी खूबसूरत लगता है। बूढ़े व्यक्ति का रोल निभाने वाले अभिमन्यु ने किरदार को खूबसूरती से जिया। जो उनके किए गए होमवर्क को भी दर्शाता है।
इस खासियत को जसवंत ने भी अपने किरदार में पेश किया। नाटक के अंत में विफल बाप बने सुरेंद्र ने किरदार को शानदार तरीके से निभाया है। खास बात उनका रोना जरा सा भी ओवर नहीं लगा। साउंड बेहद खूबसूरत तरीके से नाटक को आगे ले गया और लाइट का इस्तेमाल भी शानदार रहा।
सिर्फ एक खामी
नाटक में कुछ खूबसूरत पल थे, जब कलाकारों ने दमदार अभिनय किया, लेकिन सेट में इस्तेमाल हुई प्लासटिक की कुर्सियां, कुछ जगहों में काफी शोर करने लगती हैं, जिसकी वजह से डॉयलाग सुनने में तकलीफ हुई।