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'बैताल पच्चीसी' ने दर्शकों को याद कराया बचपन

Thu, 22 May 2014 01:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब कला भवन सेक्टर 16 में चल रहे तीन दिवसिय बाल कथा मंचन के अंतिम दिन बुधवार को नाटक 'बैताल पच्चीसी' खेला गया। मास्क थिएटर द्वारा आयोजित इस नाटक उत्सव में गुरुकुल ग्लोबल स्कूल के 26 बच्चों ने अदाकारी की।
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नाटक की कहानी दूरदर्शन में आने वाले बैताल पच्चीसी जैसे ही थी जिसमें विक्रम बेताल को पकड़ लेता है। बेताल विक्रम को बिना कुछ बोले कहानी सुनने के लिए कहता है। कहानी की शुरूआत होती है 3 ब्राह्मण के बच्चों से।

ब्राह्मण अपने बच्चों को समुद्र में से कछुआ पकड़कर लाने को बोलता है। तीनों बच्चे कछुआ पकड़ तो लेते है पर इतने संवेदनशील होते हैं कि उसे उठा नहीं सकते। ऐसे में तीनों एक दूसरे से झगड़ा करते हैं और एक दूसरे को उठाने के लिए बोलते हैं।
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पास खड़ा एक ब्राह्मण उनकी सारी बातें सुनकर उन्हें राजा के पास लेकर जाता है। कौन ज्यादा संवेदनशील है इस बात का निर्णय करने के लिए राजा पहले बच्चे को चावल लाने के लिए बोलता है। बच्चा जब चावल लाता है तो उसे शमशान घाट के धुएं की दुर्गंध आती है। बच्चा चावल लाने से मना कर देता है।

राजा दूसरे बच्चे को नाच गाने के लिए कहता है दूसरे बच्चे को नाचने वाले में से बकरी के दूध की खुशबू आती है वह भी खुद को संवेदनशील बताता है। तीसरा बच्चा रात को सो नहीं पाता वह उठता है और कहता है कि उसकी पीठ पर कु छ चुभ रहा है जिससे उसकी कमर पर निशान भी पड़ जाता है।

जब गद्दे को झाड़ा जाता है तो उसमें से एक बाल निकलता है। जिसका निशान बच्चे की कमर पर पड़ जाता है। तब विक्रम बेताल से पूछता है कि राजा क्या निर्णय लेता है। तब बेताल विक्रम को बताता है कि राजा निर्णय लेता है कि तीसरा बच्चा सबसे ज्यादा संवेदनशील है। क्योंकि उसके पास इस बात का सबूत है। 
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