इतने सालों में नेताओं की कुर्सी बदली है, लेकिन देश में गरीबी नहीं कम हुई। कुछ यही मैसेज लेकर मंगलवार शाम नाटक ‘चुकाएंगे नहीं’ का मंचन किया जाएगा।
इटालियन लेखक दारिआ फो के लिखे नाटक ‘कांट पे वोंट पे’ का हिंदी में अनुवाद अमिताभ श्रीवास्तव ने किया है। इसका निर्देशन शहर के थिएटर ग्रुप सात्विक आर्ट सोसाइटी के सदस्य अमित सनोरिया और सरवर अली ने किया है।
सरवन ने बताया देश के वर्तमान हालात को देखते हुए नाटक का चयन किया गया है। नाटक रियलिस्टिक है, इसलिए इसके सेट में आर्डिनरी वर्क किया गया है, लेकिन ज्यादा ध्यान अदाकारी पर दिया गया है।
सेट में एक घर का दृश्य दिखाया जाएगा, जिसके इर्द गिर्द ही कहानी घूमती रहती है। लाइट्स में कुछ छोटे बदलाव किए हैं, जिसमें जब एक व्यक्ति अंधा हो जाता है तो उसे लाइट के जरिए दिखाया जाएगा।
नाटक की अवधि एक घंटा चालिस मिनट की है। इसका मंचन मंजाब कला भवन में मंगलवार शाम 6.15 बजे शुरू होगा। नाटक के लिए एंट्री फ्री है।