पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि पंजाब में भाजपा-अकाली गठबंधन अपनी राख खो चुका है। अब जनता पूरी तरह कांग्रेस के साथ है। ऐसे में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है कि वे खोई हुई साख को बचा सकें। प्रताप सिंह बाजवा मंगलवार को भोआ विधानसभा क्षेत्र में किया प्रचार के दौरान चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अपने प्रदर्शन के आधार पर ही उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को चुनौती दी है। गुरदासपुर से दोबरा चुनाव लड़ रहे बाजवा ने कहा कि राज्य सरकार व विशेषकर उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल तथा राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ लोगों में रोष है। मोदी इन हालातों को बदलने में सफल नहीं हो सकते। राज्य से भाजपा-अकाली गठबंधन का सफाया तय है।
उन्होंने कहा कि निराश गठबंधन मोदी की ओर देख रहा है, परंतु राय के हालात पूरे देशों से अलग हैं। सरकार द्वारा विकास संबंधी किए जा रहे दावे सिर्फ यही हैं कि कभी अग्रणी राय रहने वाला पंजाब आज नशेड़ियों का राय बन चुका है और लोगों ने खुलेआम मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सहित शासकों से मांग करनी शुरू कर दी है, राजस्थान की तरह यहां भी चूरापोस्त बेचने के लिए लाइसैंस जारी किए जाएं।
उन्होंने कहा कि नशों की तस्करी सत्ताधारी पार्टी का माफिया कर रहा है। अपनी हार का माहौल देखकर अकाली उम्मीदवार इतने घबरा गए हैं कि इन्होंने भी इस मांग का समर्थन करना शुरू कर दिया है। इस संबंध में उन्होंने फरीदकोट से अकाली दल की उम्मीदवार परमजीत कौर गुलशन की उदाहरण पेश की।
बाजवा ने कहा कि राय में जंगल राज बन चुका है और हैरानीजनक बात है कि सुखबीर बादल की मलकियत वाली ओरबिट ट्रांसपोर्ट कंपनी गत दिवस जालंधर में जी.टी. रोड पर पंजाब रोडवेज की बस से सवारियां जबरन अपनी बस पर चढ़ा रही थी। उप मुख्यमंत्री ने राय के प्राइवेट ट्रांसपोर्ट पर कब्जा जमा लिया है व अब यह सरकारी ट्रांसपोर्ट को बंद करना चाहते हैं। हालात यह हैं कि पंजाब रोडवेज के रूटों के बादल ट्रांसपोर्ट ने अपना लिया है।
प्रदेश कांग्रेस प्रधान ने कहा कि अकाली-भाजपा गठबंधन सिर्फ मोदी के नाम पर वोट मांग रहा है, परंतु इससे राय में सरकारी विरोधी लहर नहीं दबने वाली। खन्ना बारे बात करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई के बाबू को उनके प्रदर्शन पर सवाल करने पहले दो बार सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि 15वीं लोकसभा में उनकी मौजूदगी 82 प्रतिशत रही, जबकि खन्ना की बीते 14वें लोकसभा के कार्यकाल के दौरान सिर्फ 41 प्रतिशत थी।
इसी तरह, उन्होंने 359 सवाल पूछे, जबकि इसके मुकाबले खन्ना ने पांच सालों मे सिर्फ 4 सवाल ही पूछे। जो लोकसभा के रिकार्ड का हिस्सा है। केन्द्र से बड़े प्रोजेक्ट लाने की बात पर उन्होंने कहा कि खन्ना को इस बार मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री से पूछना चाहिए, जिन्होंने प्रोजेक्टों के लिए जमीन देने की राह में रोडे़ अटकाए। सिर्फ दो प्रोजेक्टों की बात करें, तो कलानौर में रेल कोच फैक्टरी व बयास कादियां रेलवे लाइन का प्रोजेक्ट इसी रवैये का शिकार हुआ।