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तैयारीः पांच करोड़ की लागत से सेक्टर 43 में बनेगा रैन बसेरा, चीफ आर्किटेक्ट बनाएंगे डिजाइन

Mon, 13 Jul 2020 12:42 PM IST
खुशबू गोयल नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़

सार

  • चंडीगढ़ प्रशासन ने नगर निगम को भूमि आवंटित की
  • 100 से ज्यादा लोगों के रहने की होगी व्यवस्था
  • दिव्यांगों, महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग व्यवस्था
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रैन बसेरा - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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सैलानियों की सुविधा के लिए नगर निगम चंडीगढ़ सेक्टर-43 में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से एक रैन बसेरा बनवाने जा रहा है। इसके लिए प्रशासन ने निगम को भूमि भी आवंटित कर दी है। चीफ आर्किटेक्ट कपिल सेतिया जल्द इसका डिजाइन तैयार करके देंगे। बता दें कि हाल ही में हुई बैठक में निगम ने प्रशासन से रैन बसेरे की मांग की थी।
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प्रशासन ने अपने रैन बसेरे पहले ही किसी न किसी को दे रखे हैं। ऐसे में काफी दिनों से अटके इस प्रोजेक्ट को अब सहमति मिल गई है। इस रैन बसेरे में 100 से ज्यादा लोगों के रहने की व्यवस्था होगी। चीफ अर्किटेक्ट से भूमि के हिसाब से रैन बसेरे का डिजाइन तैयार करने को कहा गया है।

साथ ही शहर अब ओडीएफ प्लस प्लस के लिए चुना जा चुका है, इसलिए रैन बसेरे में महिला, पुरुष व दिव्यांगो के लिए अलग-अलग व्यवस्था करने को कहा गया है। रैन बसेरा बनाने के लिए एनयूएलएम योजना के तहत निगम को केंद्र से फंड मिलेगा। डिजाइन तैयार होने के बाद उसे केंद्र को भेजा जाएगा। उसके बाद फंड रिलीज होगा। 
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पांच में से एक रैन बसेरा है निगम के पास

प्रशासन के पांच रैन बसेरे हैं, जिसमें से सेक्टर-25 स्थित ट्रक पार्किंग में बना रैन बसेरा निगम के पास है। सेक्टर-28 व 29 के रैन बसेरे में आईटीबीपी और सीआरपीएफ के जवान रहते हैं।

वहीं, सेक्टर-17 स्थित रैन बसेरा रेडक्रॉस के पास है और मनीमाजरा स्थित रैन बसेरे में दिव्यांगों का डे स्कूल चलता है जो एक एनजीओ के पास है। निगम ने जब प्रशासन के सामने रैन बसेरे की मांग रखी तब प्रशासन को जानकारी हुई कि सभी रैन बसेरे किसी न किसी को दिए जा चुके हैं। नहीं तो प्रशासन को जानकारी ही नहीं थी।

सेक्टर 28 व 29 के रैन बसेरे को खाली कराने को लिखा जाएगा पत्र
लगभग 25 साल पहले निगम ने सेक्टर-28 व 29 का रैन बसेरा आईटीबीपी व सीआरपीएफ को दे दिया था। अब यह बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। लोकल बटालियन के प्रभारियों से प्रशासन ने बात की तो उनका कहना है कि अगर वह लोग इसे खाली कर देंगे तो उनके जवान कहां रहेंगे। फिलहाल वह रैन बसेरे को खाली नहीं कर सकते।

उसके बाद बैठक में तय हुआ कि अब केंद्रीय मंत्रालय को पत्र लिखकर जवानों को अन्य जगह शिफ्ट करने को कहा जाएगा ताकि बिल्डिंग की मरम्मत कराई जा सके वर्ना यहां बड़ा हादसा हो सकता है। ज्ञात हो कि रैन बसेरे में रहने वाले जवान हाईकोर्ट व शहर के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था में तैनात हैं। 
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इस बार एक दिसंबर से बनेंगे अस्थायी रैन बसेरे

बैठक में फैसला लिया गया कि इस बार सर्दियों के लिए एक दिसंबर से अस्थायी रैन बसेरे की बुकिंग शुरू कर देंगे क्योंकि हर साल रैन बसेरे बनाते-बनाते आधे से ज्यादा दिसंबर निकल जाता है। ऐसे में लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। उसके बाद मार्च तक रैन बसेरा को हटा लिया जाएगा। इस साल भी सर्दियां तेज हो गईं थीं और निगम ने दिसंबर के अंत में जाकर अस्थायी रैन बसेरे लगाए थे।   

रैन बसेरे का प्रस्ताव काफी दिनों से अटका हुआ था। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित की गई शेल्टर मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक में स्थायी रैन बसेरे समेत सभी आवश्यक प्रस्तावों पर सहमति बन गई है। कमेटी में प्रशासन, कचहरी व सामाजिक सरोकार से जुड़े लोग मौजूद हैं इसलिए सभी कार्यों पर आसानी से सहमति बन जाती है। जल्द ही निगम का स्थायी रैन बसेरा बन जाएगा।   
- केके यादव,कमिश्नर, नगर निगम
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