एक साथ दो नगर कीर्तन निकाले जाने पर 17 साल बाद चंडीगढ़ के सिख संगठनों में मतभेद फिर उभर आया। इसकी शिकायत अकाल तख्त से करने की बात हो रही है।
वर्ष 1997 में नगर कीर्तन निकाले जाने को लेकर अमृतसर में अकाल तख्त पर फैसला हुआ था। इस फैसले के अंतर्गत कहां-कहां से नगर कीर्तन निकाले जाने हैं उसके बारे में तय कर दिया गया था।
इसके तहत नौवीं पातशाही श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के शहीदी दिवस पर सेक्टर-22 के गरुद्वारा साहिब से, श्री गुरुनानक देव जी की जयंती पर सेक्टर-19 के गुरुद्वारा साहिब से और दसवीं पातशाही श्री गुरु गोबिंद सिंह की प्रकाशोत्सव पर सेक्टर-34 के गुरुद्वारा साहिब से नगर कीर्तन निकालने का आदेश हुआ था।
अब चंडीगढ़ में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर दो-दो नगर कीर्तन निकाले जा रहे हैं। केंद्रीय तालमेल कमेटी ने वीरवार को नगर कीर्तन निकाला, जबकि चंडीगढ़ समूह गुरुद्वारा प्रबंधक संगठन शुक्रवार को नगर कीर्तन निकालेगा।
कोट...
अकाल तख्त के आदेश का पालन करते हुए शुक्रवार को नगर कीर्तन निकाला जाएगा। जिन्होंने आज नगर कीर्तन निकाला है। उनकी शिकायत अकाल तख्त से की जाएगी। नगर कीर्तन निकालने का फैसला वर्ष 1997 में अकाल तख्त पर हुआ था।
-अमर सिंह, प्रधान, गुरुद्वारा साहिब, सेक्टर-34
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बार-बार बेनती के बाद भी हमारी नहीं सुनी गई। एक सौ से भी अधिक गुरुद्वारे हैं। सभी जगहों से नगर कीर्तन निकाले जाने चाहिए। इससे संगत में ठीक संकेत जाता है। हमारी नहीं सुनी गई तो संगत ने फैसला लिया है।
-रजिंदर सिंह साहनी, महासचिव, केंद्रीय तालमेल कमेटी, चंडीगढ़।
नगर कीर्तन निकालने के लिए पहले ही फैसला हो गया था। व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए लोग पंथ की एकता खराब कर रहे हैं। ऐसे में ऊपर वाले की मेहर कभी नहीं होगी।
-हरजिंदर कौर, पूर्व मेयर एवं सदस्य, एसजीपीसी, चंडीगढ़